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संवाददाता –  Ambika Prasad Ojha (Journalist)

 

गणतंत्र दिवस: स्वतंत्रता और कर्तव्यों का प्रतीक

गणतंत्र दिवस भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो नागरिकों को न केवल स्वतंत्रता की याद दिलाता है, बल्कि उनके संवैधानिक कर्तव्यों का भी बोध कराता है। यह दिन हमें यह समझाने का अवसर देता है कि लोकतंत्र केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों से भी मजबूत होता है। इसी भावना के साथ 26 जनवरी को बल्लभगढ़ में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन पूरे उत्साह और गरिमा के साथ किया गया।


दशहरा ग्राउंड में भव्य समारोह

बल्लभगढ़ के दशहरा ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। आयोजन स्थल को राष्ट्रीय ध्वज, रंग-बिरंगी सजावट और देशभक्ति संदेशों से सुसज्जित किया गया था। सुबह से ही लोगों में उत्साह देखने को मिला और कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई।


राष्ट्रीय ध्वजारोहण और परेड सलामी

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मूलचंद शर्मा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस दौरान पुलिस बल, एनसीसी कैडेट्स और स्कूली बच्चों द्वारा अनुशासित मार्च-पास्ट प्रस्तुत किया गया, जिसने कार्यक्रम को औपचारिक गरिमा प्रदान की।

ध्वजारोहण के बाद उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्रगान के माध्यम से देश के प्रति सम्मान और एकजुटता का संदेश दिया।


संविधान और लोकतंत्र पर विचार

समारोह को संबोधित करते हुए विधायक मूलचंद शर्मा ने कहा कि शहीदों की शहादत को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने संविधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दस्तावेज देश को एकजुट रखने की आधारशिला है। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिक संविधान में निहित मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी की भूमिका देश के भविष्य को आकार देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है और शिक्षा ही समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है।


शिक्षा और सामाजिक विकास की भूमिका

अपने संबोधन में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा से जुड़े प्रयासों की चर्चा की। नई सरकारी स्कूलों की स्थापना, शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही आत्मनिर्भर और जागरूक समाज का निर्माण कर सकती है।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

कार्यक्रम की खास आकर्षण विभिन्न विद्यालयों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। सेंट जॉन्स स्कूल, विद्यासागर इंटरनेशनल स्कूल, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सीही, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बल्लभगढ़ सहित कई शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

देशभक्ति गीतों पर आधारित नृत्य, समूह गायन और लघु नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। इन प्रस्तुतियों में स्वतंत्रता संग्राम, शहीदों के बलिदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।


बच्चों की प्रस्तुतियों को मिला सम्मान

प्रत्येक प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इससे बच्चों में आत्मविश्वास और देश के प्रति जुड़ाव की भावना और अधिक प्रबल हुई।


देशभक्ति और सामाजिक एकता का संदेश

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। बच्चों की भागीदारी ने यह साबित किया कि देशभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों में भी उतनी ही प्रबल है।


कार्यक्रम का गरिमामय समापन

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, समर्पण और सामूहिक सहभागिता देखने को मिली। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना को भी मजबूत करने वाला साबित हुआ।


निष्कर्ष

77वें गणतंत्र दिवस पर बल्लभगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम शहीदों के बलिदान, संविधान की महत्ता और युवाओं की भूमिका को रेखांकित करता है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विचारोत्तेजक संबोधनों और नागरिक सहभागिता के साथ यह समारोह सभी उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणादायक और स्मरणीय बन गया।

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