संत समाज को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला विकास और विरासत साथ साथ के संकल्प के साथ नए भारत के निर्माण पर जोर

पाटौदी  | हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने आज पाटौदी की पावन भूमि पर आयोजित भव्य संत सम्मेलन में अपने ओजस्वी और भावनात्मक संबोधन के माध्यम से भारतीय संस्कृति संत परंपरा और सामाजिक एकता के महत्व को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत संत समाज मंचासीन महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज सभी संत महात्माओं माताओं बहनों बुजुर्गों एवं युवा साथियों को सादर प्रणाम करते हुए की और स्वयं को मंत्री नहीं बल्कि एक परिवार के सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया।
विपुल गोयल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि 106 वर्षों की तपस्या साधना और गौरवशाली परंपरा का जीवंत उत्सव है। उन्होंने आश्रम हरि मंदिर एवं पूज्य स्वामी धर्मदेव जी महाराज को हृदय से नमन करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि समाज को जोड़ने संस्कार देने और शिक्षा का प्रकाश फैलाने वाली प्रेरणास्थली होती हैं जो किसी भी समाज की आत्मा का निर्माण करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित है। भारत केवल एक देश नहीं बल्कि एक जीवंत संस्कृति है यह कहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व की अनेक प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ समाप्त हो गईं लेकिन भारत आज भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और निरंतर समृद्ध हो रहा है। इसका श्रेय संत समाज और संस्कृति के संरक्षण में लगे उन लोगों को जाता है जो निरंतर इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

अपने संबोधन में विपुल गोयल ने संत समाज की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब जब समाज दिशा से भटका है तब तब संतों ने उसे सही मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा ही सर्वोच्च सेवा है और मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। गौ सेवा शिक्षा के प्रसार सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में संत समाज की भूमिका सदैव अग्रणी रही है।
विपुल गोयल ने नए भारत की परिकल्पना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज देश अभूतपूर्व गति से विकास की ओर अग्रसर है लेकिन साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी संजोकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सोच स्पष्ट है हम ऐसा भारत बनाना चाहते हैं जो आधुनिक भी हो सशक्त भी हो और अपनी विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ भी हो। विकास और विरासत साथ साथ के इसी मूल मंत्र के साथ विकसित भारत का निर्माण किया जा रहा है।
सरकार की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास केवल एक नारा नहीं बल्कि हमारी प्रतिबद्धता और कार्य संस्कृति का आधार है। सरकार गांव गरीब किसान युवा और महिलाओं को सशक्त बनाते हुए समग्र विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए राजनीति नहीं बल्कि सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।

पाटौदी की धरती की महत्ता को रेखांकित करते हुए विपुल गोयल ने कहा कि यह भूमि केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि संस्कारों श्रद्धा और सम्मान की प्रतीक है। यहां आयोजित यह सम्मेलन अब केवल पाटौदी तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे हरियाणा की पहचान बन चुका है और समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जनता का आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है और यही विश्वास उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। मैं हमेशा आपके बीच आपके लिए और आपके साथ खड़ा रहूंगा इस भाव के साथ उन्होंने जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अंत में विपुल गोयल ने सभी उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे मिलकर अपने संस्कारों को सहेजें समाज को संगठित और सशक्त बनाएं तथा राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लें। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए सभी आयोजकों और श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए जय श्री राम और जय हिन्द के उद्घोष के साथ अपने संबोधन का समापन किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी विधायक मुकेश शर्मा जी, तथा हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुगण एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। सभी ने इस भव्य आयोजन में सहभागिता करते हुए संस्कृति, संत परंपरा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाया।

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