फरीदाबाद| ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने उन्नत बाल चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 3 वर्षीय बच्चे में पाई जाने वाली दुर्लभ बीमारी विस्कॉट–एल्ड्रिच सिंड्रोम का सफल उपचार किया है। अस्पताल में बच्चे का मैच्ड सिबलिंग डोनर बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। यह उपलब्धि ईएसआईसी स्वास्थ्य प्रणाली में दुर्लभ प्राथमिक प्रतिरक्षा संबंधी रोगों के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
विस्कॉट–एल्ड्रिच सिंड्रोम एक दुर्लभ एक्स-लिंक्ड आनुवंशिक प्रतिरक्षा विकार है, जो विश्वभर में प्रति दस लाख पुरुष नवजात बच्चों में लगभग 1 से 10 बच्चों को प्रभावित करता है। इस बीमारी में बार-बार संक्रमण होना, एक्जिमा, प्लेटलेट्स की कमी, अत्यधिक रक्तस्राव की प्रवृत्ति तथा ऑटोइम्यून बीमारियों और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। विकासशील देशों में समय पर पहचान और प्रत्यारोपण की सुविधा न मिलने के कारण मृत्यु दर अधिक रहती है। इस बीमारी का एकमात्र स्थायी उपचार बोन मैरो ट्रांसप्लांट माना जाता है, जिसमें पूर्ण रूप से मैच करने वाले सिबलिंग डोनर से शुरुआती अवस्था में ट्रांसप्लांट किए जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 85 से 90 प्रतिशत तक सफलता दर दर्ज की गई है।
बच्चे का एलोजेनिक हेमाटोपोएटिक स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया, जिसमें पूर्ण रूप से मैच करने वाले सिबलिंग डोनर से स्टेम सेल प्राप्त किए गए। स्टेम सेल संग्रहण विशेष एफेरेसिस मशीन के माध्यम से किया गया, जिससे सुरक्षित और प्रभावी तरीके से परिधीय रक्त स्टेम सेल एकत्र किए जा सके। आवश्यक कंडीशनिंग प्रक्रिया के बाद इन स्टेम सेल्स को सफलतापूर्वक मरीज में प्रत्यारोपित किया गया।
ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के दौरान ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मरीज को इर्रेडिएटेड ब्लड कंपोनेंट्स, जिनमें पैक्ड रेड ब्लड सेल्स और सिंगल डोनर प्लेटलेट्स शामिल थे, उपलब्ध कराए गए। इससे ट्रांसफ्यूजन से जुड़ी जटिलताओं और ग्राफ्ट-वर्सेस-होस्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में सहायता मिली।
वर्तमान में बच्चे में सफल एंग्राफ्टमेंट हो चुका है, जिसका अर्थ है कि डोनर स्टेम सेल्स ने मरीज के बोन मैरो में स्वस्थ रक्त कोशिकाओं का निर्माण शुरू कर दिया है। बच्चा ट्रांसप्लांट टीम की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
इस बहु-विषयक ट्रांसप्लांट टीम में डॉ. सिल्की जैन, ब्रिगेडियर डॉ. तथागत चटर्जी, डॉ. सरोज राजपूत सहित बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ शामिल रहे।
अस्पताल प्रशासन और डॉ. चव्हाण कालिदास दत्तात्रेय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरी ट्रांसप्लांट टीम को बधाई देते हुए कहा कि ईएसआईसी जटिल रक्त एवं प्रतिरक्षा संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को उन्नत, सस्ती और जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह सफलता कर्मचारी राज्य बीमा निगम की स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों के भरोसे को और मजबूत करती है। अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट सुविधाओं की उपलब्धता से ईएसआईसी बीमित व्यक्तियों को उच्च गुणवत्ता वाली, किफायती और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं अपने ही स्वास्थ्य तंत्र के भीतर प्राप्त हो सकेंगी।

