– बॉलीवुड के प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर अरविंद के. ने ली वर्कशॉप
– कहा, कैमरा कहानी व भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाने का सशक्त साधन
रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में बॉलीवुड के प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर अरविंद के. ने छात्रों की वर्कशॉप ली। वर्कशॉप का आयोजन फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी की ओर से ग्रेजुएशन सिनेमेटोग्राफी कोर्स के थर्ड सेमेस्टर के छात्रों के लिए किया गया। सिनेमेटोग्राफर अरविंद के. के काम को गंगाजल, दिल-दोस्ती, ब्लडी इश्क, धीना आदि हिन्दी फिल्मों में खूब सराहना मिली है।
वर्कशॉप के दौरान सिनेमेटोग्राफर अरविंद के. ने छात्रों के साथ फिल्मी दुनिया के अपने अनुभव साझा किए। वर्कशॉप का उद्देश्य छात्रों को फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें कैमरा, लाइट और सीन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देना रहा। इस दौरान अरविंद के. ने छात्रों को बताया कि किसी भी फिल्म की कहानी को प्रभावशाली बनाने में सिनेमेटोग्राफी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि कैमरा केवल दृश्य रिकॉर्ड करने का माध्यम नहीं है, बल्कि कहानी और भावनाओं को दर्शकों तक पहुंचाने का एक सशक्त साधन है। कैमरे की स्थिति, लेंस का चुनाव, फ्रेमिंग, लाइट व रंगों का संयोजन किसी दृश्य के प्रभाव को पूरी तरह बदल सकता है।
वर्कशॉप में छात्रों को अलग-अलग प्रकार के शॉट्स व कैमरा मूवमेंट की जानकारी दी गई। उन्होंने वाइड शॉट, मिड शॉट, क्लोज-अप व कैमरा एंगल के उपयोग को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। छात्रों ने भी कैमरे के साथ प्रायोगिक अभ्यास किया व विभिन्न परिस्थितियों में एक ही दृश्य को अलग-अलग तरीके से शूट करने का प्रयास किया। अरविंद के. ने लाइटिंग को सिनेमेटोग्राफी का अहम हिस्सा बताते हुए छात्रों को प्राकृतिक और कृत्रिम रोशनी के इस्तेमाल की तकनीक समझाई। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों में भी रचनात्मक सोच के जरिए प्रभावी दृश्य तैयार किए जा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक के साथ कहानी की समझ विकसित करने पर जोर दिया।
वर्कशॉप के दौरान छात्रों ने फिल्म निर्माण, कैमरा तकनीक, लैंस, रंग संयोजन और इंडस्ट्री में करियर की संभावनाओं से जुड़े सवाल भी पूछे। अरविंद के. ने विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें लगातार फिल्में देखने, शूटिंग का अभ्यास करने और अपने आसपास की दुनिया को एक सिनेमेटोग्राफर की नजर से देखने की सलाह दी। वर्कशॉप के समापन पर छात्रों ने इस अनुभव को बेहद उपयोगी बताया। उनका कहना था कि विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में व्यावहारिक जानकारी हासिल करने से उन्हें फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों में रचनात्मकता और तकनीकी कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

