नई दिल्ली, 7 सितंबर। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया राहतकर के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर के फरीदाबाद स्थित ताज सूरजकुंड रिजॉर्ट में ‘शी इज ए चेंजमेकर’ पहल के तहत महिला विधायकों के लिए ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया।

कार्यक्रम में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, केरल की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदु कृष्णा, केरल की एससी, एसटी एवं ओबीसी मंत्री के.ए. तुलसी, हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेश नागर, पश्चिम बंगाल की आवास विभाग की राज्य मंत्री कलिता माझी तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यशाला में देशभर से 100 से अधिक महिला विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुईं। कार्यक्रम ने महिला जनप्रतिनिधियों को विचार-विमर्श, अनुभव साझा करने और विधायी एवं प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर ने कहा कि महिला विधायक केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों की प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और सुशासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिलाओं की सशक्त आवाज भी हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी शासन व्यवस्था में नए और महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आती है तथा उनका नेतृत्व व्यापक सामाजिक बदलाव का आधार बन सकता है।

उन्होंने महिला विधायकों से अपने संवैधानिक अधिकारों और सार्वजनिक मंचों का प्रभावी उपयोग करते हुए महिलाओं की आकांक्षाओं और समस्याओं को मजबूती से उठाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और सरकारी योजनाओं एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठा सकें।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यशाला को लोकतांत्रिक क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि महिला विधायकों की क्षमताओं को मजबूत करना लोकतंत्र की गुणवत्ता को सीधे तौर पर मजबूत करता है। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों से संसदीय प्रक्रियाओं, नीतियों, कानूनों और बजट से जुड़े विषयों की अपनी समझ को और गहरा करने तथा संवाद और जनभागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र में लोगों का विश्वास मजबूत करने का आग्रह किया।

बिरला ने कहा कि महिला विधायक अपनी जनसेवा को समावेशी शासन को बढ़ावा देने का माध्यम बनाएं और अपने पद एवं जिम्मेदारियों का उपयोग राज्यों तथा देश के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए करें।

कार्यशाला के पहले दिन नेतृत्व, विधायी कार्यप्रणाली, सार्वजनिक नीति और लैंगिक-संवेदनशील शासन से जुड़े चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में महिला विधायकों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ सार्वजनिक नेतृत्व और शासन के क्षेत्र में अपने अनुभव तथा बेहतर कार्यप्रणालियां साझा करने का अवसर मिला।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि इस तरह की क्षमता निर्माण पहलों का उद्देश्य महिला विधायकों को नीति निर्माण, शासन और जनसेवा में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना है। आयोग का मानना है कि इससे सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सार्थक और निरंतर नेतृत्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिक समावेशी और संवेदनशील शासन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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