रावण वध का मंचन देखने उमड़ी दर्शकों की भारी भीड़, कलाकारों के सजीव अभिनय ने बांधा समां
फरीदाबाद। विजय रामलीला कमेटी के भव्य मंच पर रावण वध का रोमांचक मंचन देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। कलाकारों के शानदार अभिनय, प्रभावशाली संवादों और युद्ध के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को भावुक करने के साथ-साथ रोमांचित भी किया। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के मंचन के दौरान पूरा वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
रामलीला का शुभारंभ अहिरावण के वध के प्रसंग से हुआ, जिसमें रमेश नागपाल ने अहिरावण की भूमिका निभाई। इसके बाद लक्ष्मण के रूप में नितिन शर्मा ने रावण के पुत्र मेघनाद का वध किया। मेघनाद की मृत्यु के बाद लंका में छाए शोक का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।
इसके पश्चात भगवान राम और रावण के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। भगवान राम की भूमिका में निशांत नागपाल और रावण की भूमिका में टेकचंद नागपाल ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। युद्ध के दौरान दोनों कलाकारों के बीच संवादों और युद्ध कौशल के दृश्यों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। अंततः भगवान राम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया।
रावण वध के बाद भगवान राम के निर्देश पर लक्ष्मण द्वारा रावण से राजनीति और ज्ञान की शिक्षा लेने का प्रसंग भी मंचित किया गया। इस दृश्य के माध्यम से दर्शकों को संदेश दिया गया कि शत्रु में भी यदि ज्ञान और अनुभव हो, तो उससे सीख लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
इसके पश्चात माता सीता की अग्निपरीक्षा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसमें दीपांशी अरोड़ा ने माता सीता की भूमिका निभाई। इस प्रसंग ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
विजय रामलीला कमेटी के मंच पर प्रस्तुत इन प्रसंगों के माध्यम से संदेश दिया गया कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। जीवन में सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलकर ही वास्तविक विजय प्राप्त की जा सकती है।

