– देसी अंदाज और हरियाणवी सुरों का संगम, अमित ढुल की गायकी ने जीता दिल
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 24 अक्टूबर। सूरजकुंड दिवाली मेले में आज शनिवार दोपहर हरियाणवी गायक अमित ढुल ने अपनी शानदार गायकी से दर्शकों का मन मोह लिया। मेले की मुख्य चौपाल पर आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में उन्होंने एक के बाद एक लोकप्रिय हरियाणवी गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया। उनके गीतों की धुन पर दर्शक झूमते नजर आए और पूरे परिसर में हरियाणवी संस्कृति एवं संगीत का रंग छा गया।
अमित ढुल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत से ही दर्शकों में उत्साह भर दिया। उन्होंने ‘रांझा रांझा करदी’, ‘रह गए मिलना रांझा छेल’, ‘यार तेरा चेतक चलावे’, ‘तुझे चस्का लेन फरारी दा’, ‘मेरा बालम धारेदार चलावे जिप्सी’, ‘सामने होए यार ते नचना पैंदा है’, ‘मेरी मां ने बड़ा जमाई प्यारा लागे से’ और ‘मेरा जी लग्या से बाप्या में’ जैसे लोकप्रिय हरियाणवी गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
इस अवसर पर अमित ढुल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा की सराहना करते हुए कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेले जैसे आयोजन प्रदेश की कला, संस्कृति और लोक संगीत को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से हरियाणवी कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिलता है और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलती है। उन्होंने मेले के आयोजन और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
उनकी गायकी में हरियाणवी लोकजीवन, देसी अंदाज और क्षेत्रीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। गीतों की आकर्षक धुनों और ऊर्जावान प्रस्तुति ने मेले में मौजूद लोगों को खूब आनंदित किया। दर्शक तालियां बजाते हुए गीतों का आनंद लेते और धुनों पर झूमते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान मुख्य चौपाल में उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।
सूरजकुंड दिवाली मेला हस्तशिल्प, लोककला, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान कर रहा है। मेले में आयोजित ऐसे संगीत कार्यक्रम दर्शकों को हरियाणा की समृद्ध लोकसंस्कृति और संगीत परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ मनोरंजन का भरपूर अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। अमित ढुल की प्रस्तुति मेले में पहुंचे दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

