-लोक कला और पारंपरिक संगीत ने मेले के माहौल में घोली सांस्कृतिक रंगत
सूरजकुंड (फरीदाबाद), अक्टूबर। लोक कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने के उद्देश्य से सूरजकुंड परिसर में आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेला-2026 पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में नगाड़ों की गूंजती थाप और बीन की सुरीली धुनें यहां आने वाले पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर रही हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर स्वर लहरियों के बीच पर्यटक मेले का भ्रमण करते हुए लोक संस्कृति और संगीत का आनंद ले रहे हैं।
मेले परिसर में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक संगीत पर्यटकों को भारतीय लोक परंपराओं से रूबरू करा रहा है। नगाड़ों की दमदार थाप जहां उत्साह और उमंग का संचार कर रही है, वहीं बीन की मधुर धुनें लोगों को लोक संगीत की समृद्ध परंपरा का अनुभव करा रही हैं। इन प्रस्तुतियों को देखने और सुनने के लिए पर्यटक रुक रहे हैं तथा कलाकारों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं।
सूरजकुंड दिवाली मेले में लोक वाद्य यंत्रों और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियां उत्सवी माहौल को और भी जीवंत बना रही हैं। परिवारों के साथ मेले में पहुंच रहे पर्यटक खरीदारी और खानपान के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनंद उठा रहे हैं। नगाड़ों की थाप पर थिरकते लोग और बीन की धुनों पर आनंद लेते पर्यटक मेले की रौनक को बढ़ा रहे हैं। लोक संगीत भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से कलाकार पीढिय़ों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में योगदान देते हैं। ऐसे आयोजनों से पर्यटकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को देश की लोक कलाओं तथा पारंपरिक संगीत से परिचित होने का अवसर मिलता है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेला-2026 लोक कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को बढ़ावा देने का मंच बन रहा है। मेले में विभिन्न आकर्षणों के साथ लोक संगीत की प्रस्तुतियां पर्यटकों के अनुभव को यादगार बना रही हैं।

