फरीदाबाद।
कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। अक्सर इसे केवल “तनाव हार्मोन” कहा जाता है, लेकिन कॉर्टिसोल हार्मोन शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। जब यह हार्मोन लंबे समय तक असंतुलित रहता है, तब शरीर पर इसके नकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगते हैं।
ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार, कॉर्टिसोल हार्मोन एड्रिनल ग्रंथि से निकलता है और यह शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने, रक्तचाप को संतुलित रखने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। तनाव की स्थिति में कॉर्टिसोल हार्मोन शरीर को सतर्क बनाता है ताकि व्यक्ति हालात से निपट सके।
कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन के कारण
डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि लगातार मानसिक तनाव, नींद की कमी, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन की स्थिति बन जाती है। जब कॉर्टिसोल हार्मोन लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज का खतरा, नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
लंबे समय तक कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन रहने से याददाश्त पर असर पड़ सकता है और दिमाग व नसों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन से बचाव के उपाय
कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। डॉ. गुप्ता ने सलाह दी कि रोजाना पर्याप्त नींद लें, योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें और संतुलित आहार का सेवन करें। अत्यधिक कैफीन और जंक फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है। नियमित व्यायाम तनाव को कम करने में मदद करता है और कॉर्टिसोल हार्मोन को संतुलित रखने में सहायक होता है।
यदि लगातार थकान, नींद न आना या वजन तेजी से बढ़ने जैसी समस्याएं बनी रहें, तो कॉर्टिसोल हार्मोन असंतुलन की जांच के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। समय रहते सावधानी बरतने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
