देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस
देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर संगम देखने को मिला। शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने समारोह में सहभागिता की।
कुलगुरु द्वारा तिरंगा फहराया गया
समारोह के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित सभी लोगों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। ध्वजारोहण के पश्चात सुरक्षा कर्मियों, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत अनुशासित मार्च-पास्ट की उन्होंने सलामी ली।
मार्च-पास्ट ने छात्रों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
ध्वजारोहण के उपरांत विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक श्रृंखला प्रस्तुत की गई। विश्वविद्यालय के विभिन्न क्लबों से जुड़े छात्रों ने देशभक्ति गीत, समूह नृत्य, योग प्रदर्शन और संगीत के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना को मंच पर जीवंत कर दिया।
विशेष रूप से राजपुर कलां और सहरावक स्थित सरकारी विद्यालयों से आमंत्रित स्कूली छात्रों की प्रस्तुतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों के साथ खूब सराहा।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण का संदेश
अपने संबोधन में कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन हमें संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने युवाओं से महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और इसमें युवा वर्ग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का उल्लेख
इस अवसर पर कुलगुरु ने ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्ष की स्मृति का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति और एकता का प्रतीक बनकर उभरा था और आज भी मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करता है।
उन्होंने कहा कि जैसे ‘वंदे मातरम’ ने आज़ादी की प्रेरणा दी, उसी तरह आत्मनिर्भर भारत का संकल्प आज शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के माध्यम से सशक्त राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रहा है।
आत्मनिर्भर भारत और शिक्षा की भूमिका
कुलगुरु ने आत्मनिर्भर भारत के समकालीन दृष्टिकोण पर बोलते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें नवाचार और शोध के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से उत्कृष्टता प्राप्त करने और ज्ञान को समाज एवं राष्ट्रहित में उपयोग करने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय की विकास योजनाओं की जानकारी
अपने संबोधन के दौरान कुलगुरु ने विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न अकादमिक और ढांचागत विकास परियोजनाओं की जानकारी भी साझा की। उन्होंने नई शैक्षणिक योजनाओं और भविष्य की परियोजनाओं से सभी को अवगत कराते हुए विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति में सहयोग करने का आह्वान किया।
सम्मान समारोह और कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में कुलगुरु एवं अन्य अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में राष्ट्रप्रेम की भावना और अधिक प्रबल हो गई।
इस आयोजन का संचालन अधिष्ठाता, विद्यार्थी कल्याण प्रो. प्रदीप कुमार एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। समारोह में सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर विद्यार्थियों और कर्मचारियों में मिठाइयां भी वितरित की गईं।
निष्कर्ष
जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित 77वां गणतंत्र दिवस समारोह न केवल सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि इसने युवाओं को संविधान, राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से जोड़ने का भी कार्य किया। यह आयोजन सभी प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक और स्मरणीय बन गया।
