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भोपाल | 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत शूटिंग स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता School Games Federation of India के तत्वावधान में संपन्न हुई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए युवा खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना और उनमें अनुशासन, प्रतिस्पर्धा और खेल भावना का विकास करना रहा।

राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता को भारत में स्कूली खेलों का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यहां प्रतिभागी खिलाड़ी न केवल अपने-अपने विद्यालयों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी खुद को तैयार करते हैं। इसी श्रृंखला में आयोजित 69वीं नेशनल स्कूल गेम्स 2025–26 के शूटिंग मुकाबलों ने खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।


राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कड़ा मुकाबला

इस बार शूटिंग (बॉयज़ अंडर-14) वर्ग की प्रतियोगिताओं में देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया। एयर पिस्टल और एयर राइफल जैसी तकनीकी और एकाग्रता-आधारित स्पर्धाओं में खिलाड़ियों को मानसिक संतुलन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का प्रदर्शन करना पड़ा। प्रतियोगिता के दौरान हर टीम और खिलाड़ी ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की कोशिश की, जिससे मुकाबला काफी रोमांचक रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, शूटिंग जैसे खेलों में उम्र से अधिक महत्व खिलाड़ी की एकाग्रता, धैर्य और तकनीक का होता है। अंडर-14 वर्ग में इतने उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा यह दर्शाती है कि विद्यालय स्तर पर खेल प्रशिक्षण अब पहले की तुलना में अधिक संगठित और गंभीर रूप ले रहा है।


.177 एयर पिस्टल टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन

इसी राष्ट्रीय मंच पर विद्यासागर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र कुशाग्र शर्मा ने .177 एयर पिस्टल टीम इवेंट में भाग लेते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कुशाग्र ने अपनी टीम के साथ मिलकर कुल 1119.00 अंक (19x) अर्जित किए और तृतीय स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल अंक तालिका में स्थान पाने तक सीमित रही, बल्कि यह उनके निरंतर अभ्यास और मानसिक मजबूती को भी दर्शाती है।

टीम इवेंट में खिलाड़ियों के बीच तालमेल और सामूहिक रणनीति का विशेष महत्व होता है। कुशाग्र शर्मा और उनकी टीम ने पूरे इवेंट के दौरान संयम बनाए रखा और दबाव की परिस्थितियों में भी सटीक निशाने साधे। यही कारण रहा कि टीम ने मजबूत प्रतिस्पर्धा के बावजूद पोडियम पर स्थान प्राप्त किया।


दबाव में भी संतुलित प्रदर्शन

प्रतियोगिता के दौरान कई ऐसे क्षण आए, जब मुकाबला बेहद करीबी हो गया। ऐसे समय में खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास निर्णायक साबित होता है। कुशाग्र शर्मा ने इन परिस्थितियों में भी धैर्य और एकाग्रता बनाए रखी। उनके हर शॉट में तकनीकी संतुलन और अभ्यास की झलक दिखाई दी।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि शूटिंग में खिलाड़ी की मानसिक तैयारी उतनी ही जरूरी होती है जितनी शारीरिक और तकनीकी तैयारी। कुशाग्र का प्रदर्शन इस बात का उदाहरण रहा कि सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से कम उम्र में भी बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।


विद्यालय और प्रशिक्षकों की भूमिका

इस सफलता के पीछे केवल खिलाड़ी की व्यक्तिगत मेहनत ही नहीं, बल्कि विद्यालय के प्रशिक्षकों और प्रबंधन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। नियमित अभ्यास सत्र, तकनीकी प्रशिक्षण और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे खिलाड़ी प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

विद्यालय स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षित कोच और सकारात्मक वातावरण बेहद जरूरी होते हैं। विद्यासागर इंटरनेशनल स्कूल द्वारा खेल गतिविधियों को शिक्षा के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास इस उपलब्धि में साफ दिखाई देता है।


प्रबंधन की प्रतिक्रिया

विद्यालय प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्कूल के चेयरमैन धर्मपाल यादव ने कहा कि विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ खेलों को भी समान महत्व दिया जाता है। उनका मानना है कि खेल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय का उद्देश्य छात्रों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना है, ताकि वे भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।


भविष्य को लेकर उम्मीदें

विद्यालय की प्रिंसिपल श्वेता ने भी कुशाग्र शर्मा की उपलब्धि पर संतोष जताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनका कहना था कि इस तरह की उपलब्धियां अन्य विद्यार्थियों को भी खेलों के प्रति प्रेरित करती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कुशाग्र और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

शिक्षकों और सहपाठियों ने भी इस सफलता पर खुशी जताई और इसे विद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। विद्यालय परिसर में सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जहां विद्यार्थियों को यह संदेश मिला कि मेहनत और अनुशासन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


स्कूल खेलों का बढ़ता महत्व

राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताएं आज केवल पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह खिलाड़ियों के समग्र विकास का मंच बन चुकी हैं। यहां से निकलकर कई खिलाड़ी आगे चलकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी कारण इन प्रतियोगिताओं का महत्व हर वर्ष बढ़ता जा रहा है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर पर सही दिशा में प्रशिक्षण दिया जाए, तो भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कुशाग्र शर्मा जैसी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन मिलने पर छात्र कम उम्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।


प्रेरणा का स्रोत बनी उपलब्धि

कुशाग्र शर्मा की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। यह दिखाता है कि पढ़ाई के साथ खेलों में संतुलन बनाकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

इस तरह की उपलब्धियां विद्यालय, परिवार और क्षेत्र के लिए गौरव का विषय होती हैं और आने वाली पीढ़ियों को खेलों की ओर प्रेरित करती हैं।

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