फरीदाबाद, 04 फरवरी 2026
फरीदाबाद में साइबर अपराध के मामलों पर नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में साइबर थाना एनआईटी की टीम ने क्रेडिट कार्ड प्वाइंट रिडीम करने के नाम पर की गई ऑनलाइन ठगी के एक मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में पीड़ित से कुल 1,40,367 रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
यह मामला साइबर अपराध के उस तरीके को सामने लाता है, जिसमें लोगों को आकर्षक ऑफर और संदेश भेजकर उनकी निजी बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
साइबर ठगी का मामला कैसे सामने आया
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनआईटी-5 क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 24 मई को उसके मोबाइल फोन पर क्रेडिट कार्ड प्वाइंट रिडीम से संबंधित एक संदेश प्राप्त हुआ था।
संदेश में एक लिंक दिया गया था, जिसे खोलने पर आकर्षक लाभ का उल्लेख किया गया था। लिंक खोलने के बाद शिकायतकर्ता से क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी और ओटीपी दर्ज करने को कहा गया। जानकारी दर्ज करते ही शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन अचानक हैंग हो गया।
खाते से निकली 1,40,367 रुपये की राशि
मोबाइल फोन हैंग होने के कुछ ही समय बाद शिकायतकर्ता को बैंक खाते से राशि निकलने का संदेश प्राप्त हुआ। जांच में सामने आया कि उसके खाते से कुल 1,40,367 रुपये की राशि निकाल ली गई थी।
पीड़ित ने जब अपने बैंक से संपर्क किया, तो उसे साइबर ठगी की आशंका हुई। इसके बाद उसने तुरंत साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई। समय पर शिकायत मिलने के कारण पुलिस को मामले की जांच शुरू करने में सुविधा मिली।
शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ केस
पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना एनआईटी में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। केस दर्ज होते ही साइबर अपराध से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू की गई।
पुलिस टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इसके साथ ही संदिग्ध खातों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की गई।
जांच में सामने आया ठगी का तरीका
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी ने ठगी की राशि को सीधे अपने खाते में नहीं मंगवाया था। उसने अपने एक दोस्त के नाम से बैंक खाता खुलवाया था और उस खाते में अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर कराया था।
इस खाते का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, इस खाते में ठगी की कुल राशि में से 93,578 रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस तरीके से आरोपी अपनी पहचान छिपाने का प्रयास कर रहा था।
पहले भी हो चुकी है एक गिरफ्तारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में आरोपी के दोस्त आकाश को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आकाश के नाम से खोले गए बैंक खाते का उपयोग ठगी की राशि प्राप्त करने के लिए किया गया था।
आकाश से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी तक पहुंच बनाई। इसके बाद लगातार तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।
आरोपी की गिरफ्तारी
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया। आरोपी की उम्र 29 वर्ष बताई गई है और वह शिकारपुर, दिल्ली का निवासी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी से पूछताछ में ठगी से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी किसी अन्य साइबर ठगी के मामलों में शामिल रहा है या नहीं।
अदालत में पेश कर भेजा गया जेल
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेशानुसार आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइबर ठगी के बढ़ते मामले
यह मामला फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराध की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड प्वाइंट, कैशबैक और रिवॉर्ड के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है।
अक्सर लोग जल्द लाभ के लालच में लिंक खोल देते हैं और अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। इसी जानकारी का दुरुपयोग कर अपराधी बैंक खातों से पैसे निकाल लेते हैं।
पुलिस की नागरिकों से अपील
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतें। क्रेडिट कार्ड या बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
पुलिस का कहना है कि बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन, संदेश या लिंक के माध्यम से ओटीपी या गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। यदि इस तरह का कोई संदेश प्राप्त होता है, तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें।
समय पर शिकायत से कम हो सकता है नुकसान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि साइबर ठगी की आशंका होते ही तुरंत शिकायत दर्ज कराई जाए, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समय पर बैंक और पुलिस को सूचना देने से खाते को फ्रीज कराया जा सकता है।
इसके अलावा, साइबर क्राइम हेल्पलाइन का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे ठगी की रकम को ट्रेस करने में मदद मिलती है।
डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
साइबर विशेषज्ञों का सुझाव है कि मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स में मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। इसमें मजबूत पासवर्ड, ओटीपी की गोपनीयता और नियमित रूप से ट्रांजेक्शन की जांच शामिल है।
इसके साथ ही मोबाइल फोन में किसी भी संदिग्ध ऐप को इंस्टॉल करने से बचना चाहिए। अनजान स्रोतों से आए संदेशों पर भरोसा न करें।
साइबर थाना एनआईटी की भूमिका
इस मामले में साइबर थाना एनआईटी की टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। टीम ने तकनीकी जांच के माध्यम से आरोपियों की पहचान की और समय पर गिरफ्तारी की।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीकी संसाधनों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, आम लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं।
साइबर अपराध पर नियंत्रण की दिशा में प्रयास
फरीदाबाद पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य है कि आम नागरिक डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकें। इसके लिए कानून के साथ-साथ जागरूकता को भी समान रूप से जरूरी माना जा रहा है।

