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फरीदाबाद, 04 फरवरी 2026

फरीदाबाद में साइबर ठगी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने क्रेडिट कार्ड को VISA से RUPAY में कनवर्ट करने के नाम पर की गई ऑनलाइन ठगी के एक मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 1,44,999 रुपये की राशि अवैध रूप से निकाल ली गई थी।

यह मामला दर्शाता है कि किस तरह साइबर अपराधी तकनीकी जानकारी और आकर्षक प्रस्तावों का सहारा लेकर लोगों को झांसे में ले रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की ठगी से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे अहम है।


क्रेडिट कार्ड कनवर्जन ठगी का पूरा मामला

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेक्टर-15 फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक अज्ञात मोबाइल नंबर से कॉल आई थी।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को क्रेडिट कार्ड सेवा से जुड़ा बताया और कहा कि उसका VISA क्रेडिट कार्ड RUPAY कार्ड में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया को आसान और लाभकारी बताते हुए उसने शिकायतकर्ता को विश्वास में ले लिया।


व्हाट्सएप लिंक के जरिए फंसाया गया पीड़ित

कॉल के बाद आरोपी ने शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा। लिंक में यह दावा किया गया था कि उसी के माध्यम से कार्ड कनवर्जन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

शिकायतकर्ता ने लिंक पर क्लिक किया और उसमें मांगी गई क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी भर दी। जैसे ही जानकारी दर्ज की गई, कुछ ही समय में उसके क्रेडिट कार्ड से 1,44,999 रुपये की राशि कट गई।

जब शिकायतकर्ता को बैंक से ट्रांजेक्शन का मैसेज प्राप्त हुआ, तब उसे ठगी का अहसास हुआ।


शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मामला

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने साइबर थाना सेंट्रल से संपर्क किया। उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।

पुलिस ने सबसे पहले डिजिटल ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल और लिंक से जुड़े तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण किया। इसके साथ ही यह भी जांच की गई कि कॉल किस नंबर से की गई थी और उसका उपयोग किसने किया।


जांच में सामने आया ठगी का तरीका

पुलिस जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने सीधे अपने नाम से किसी सिम कार्ड का उपयोग नहीं किया था। उसने अपने एक साथी से सिम कार्ड लेकर उसे ठगों को उपलब्ध कराया था।

इसी सिम कार्ड के माध्यम से शिकायतकर्ता को कॉल की गई थी। इस तरीके से आरोपी अपनी पहचान छिपाने और जांच से बचने की कोशिश कर रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध में अक्सर इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।


आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी

जांच के दौरान साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान भरत कुशवाह, उम्र 22 वर्ष, निवासी गांव दिसरापुर बिलबई, जिला महोबा, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।

पुलिस का कहना है कि आरोपी की पहचान तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।


अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर भेजा गया

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेशानुसार आरोपी को 4 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

पुलिस का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से और पूछताछ की जाएगी। इस दौरान यह भी जांच की जाएगी कि आरोपी किसी अन्य साइबर ठगी के मामलों में शामिल रहा है या नहीं।


साइबर थाना सेंट्रल की भूमिका

इस मामले में साइबर थाना सेंट्रल की टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। टीम ने तकनीकी जांच, डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है। इसी वजह से साइबर थाना स्तर पर विशेष टीमें सक्रिय रखी गई हैं।


बढ़ते साइबर अपराध और नए तरीके

यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां फर्जी लॉटरी या कैशबैक के नाम पर ठगी होती थी, वहीं अब क्रेडिट कार्ड कनवर्जन जैसे विषयों को हथियार बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आम लोग अक्सर तकनीकी शब्दों और बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर अपराधी लोगों को भ्रमित कर देते हैं।


पुलिस की नागरिकों से अपील

फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। बैंक या क्रेडिट कार्ड से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनियां कभी भी फोन कॉल या व्हाट्सएप लिंक के माध्यम से गोपनीय जानकारी नहीं मांगतीं।


समय पर शिकायत से कम हो सकता है नुकसान

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी को साइबर ठगी का शक होता है, तो तुरंत पुलिस और बैंक को सूचित करना चाहिए। समय पर शिकायत करने से खाते को ब्लॉक कराया जा सकता है और नुकसान को सीमित किया जा सकता है।

इसके अलावा, साइबर क्राइम से जुड़ी हेल्पलाइन का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है, ताकि शिकायत जल्द से जल्द दर्ज हो सके।


डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन करते समय कुछ बुनियादी सावधानियां बेहद जरूरी हैं। मजबूत पासवर्ड, ओटीपी की गोपनीयता और नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट की जांच ऐसे कदम हैं, जो ठगी से बचाव में मदद कर सकते हैं।

इसके साथ ही, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। मोबाइल फोन में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल करने से भी बचना चाहिए।


साइबर अपराध पर नियंत्रण की दिशा में प्रयास

फरीदाबाद पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

पुलिस का उद्देश्य है कि नागरिक डिजिटल सुविधाओं का सुरक्षित तरीके से उपयोग कर सकें। इसके लिए कानून के साथ-साथ जागरूकता को भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।

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