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फरीदाबाद, 04 फरवरी 2026

फरीदाबाद में साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी कड़ी में साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने बैंक कर्मचारी बनकर कम ब्याज दर पर लोन दिलवाने का झांसा देकर की गई ठगी के मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इस तरीके से एक व्यक्ति से कुल 31,431 रुपये की धोखाधड़ी की थी।

यह मामला उन साइबर अपराधों में शामिल है, जिनमें आम लोगों को आकर्षक लोन ऑफर का लालच देकर उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है।


फरीदाबाद लोन ठगी मामले की शुरुआत

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सेक्टर-30 फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 14 जनवरी को उसके मोबाइल फोन पर एक कॉल आई थी।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कोटक महिंद्रा बैंक का कर्मचारी बताया। उसने दावा किया कि शिकायतकर्ता के मौजूदा लोन पर ब्याज दर अधिक है और उसे कम ब्याज दर पर ज्यादा लोन दिलवाया जा सकता है। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि लोन मिलने के बाद ही भुगतान करना होगा।


ओटीपी के जरिए हासिल की गई जानकारी

शिकायतकर्ता आरोपी की बातों में आ गया। इसके बाद ठगों ने लोन फाइल लॉगिन करने का बहाना बनाकर उससे ओटीपी हासिल कर लिया। ओटीपी साझा होते ही शिकायतकर्ता के खाते से जुड़े लोन और डिजिटल जानकारी ठगों के नियंत्रण में चली गई।

कुछ समय बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता को बताया कि उसके खाते में प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 18,466 रुपये भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि गलती से आई है और इसे दिए गए QR कोड के माध्यम से वापस भेजना होगा।


इंश्योरेंस के नाम पर दूसरी रकम निकाली गई

इसके बाद 17 जनवरी को फिर से शिकायतकर्ता को कॉल किया गया। इस बार बताया गया कि लोन लगभग अप्रूव हो चुका है, लेकिन इसके लिए इंश्योरेंस जरूरी है। आरोपियों ने कहा कि इंश्योरेंस के नाम पर 12,965 रुपये खाते में भेजे जा रहे हैं, जिन्हें भी QR कोड के जरिए वापस करना होगा।

शिकायतकर्ता ने दोनों बार बताए गए निर्देशों के अनुसार QR कोड के माध्यम से भुगतान कर दिया। हालांकि काफी समय बीत जाने के बाद भी उसके खाते में कोई राशि जमा नहीं हुई।


बैंक स्टेटमेंट से हुआ ठगी का खुलासा

जब शिकायतकर्ता को संदेह हुआ, तो उसने अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट जांचा। स्टेटमेंट देखने पर सामने आया कि जिन राशियों को वह वापस भेज रहा था, वे रकम उसके खाते से लोन के रूप में निकाली गई थीं।

इस तरह शिकायतकर्ता के साथ कुल 31,431 रुपये की ठगी की गई। इसके बाद उसने तुरंत साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई।


शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

शिकायत के आधार पर साइबर थाना सेंट्रल में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। केस दर्ज होते ही पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की।

पुलिस टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।


दोनों आरोपियों की पहचान

जांच के दौरान पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:

  • शिवम रजक, निवासी शहीद सुखदेव नगर, वजीरपुर, दिल्ली

  • किशन, निवासी गांव नाहरपुर बवुरा, जिला अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश, हाल निवासी परमपुरी, उत्तम नगर, दिल्ली

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी आपस में परिचित थे और मिलकर ठगी की योजना को अंजाम दे रहे थे।


कॉल सेंटर में हुई थी दोनों की पहचान

पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी पहले एक कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। वहीं उनकी आपसी पहचान हुई थी। कॉल सेंटर में काम करने के दौरान उन्हें लोगों से बातचीत करने और बैंकिंग शब्दों का इस्तेमाल करने का अनुभव मिला।

इसी अनुभव का इस्तेमाल कर उन्होंने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर लोगों को झांसे में लेना शुरू किया। पुलिस का कहना है कि यह तरीका साइबर ठगी में आम होता जा रहा है।


दिल्ली से संचालित हो रही थी ठगी की गतिविधि

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी दिल्ली के उत्तम नगर स्थित परमपुरी इलाके में किशन के फ्लैट से ठगी की गतिविधियां संचालित कर रहे थे।

वहीं से कॉल किए जाते थे और पीड़ितों को QR कोड भेजे जाते थे। पुलिस ने इस ठिकाने की पहचान तकनीकी जांच के माध्यम से की।


अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर भेजे गए आरोपी

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर दोनों को 4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि आरोपी इससे पहले और किन लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।


बढ़ते लोन ठगी मामलों पर चिंता

यह मामला दिखाता है कि कम ब्याज पर लोन दिलाने का लालच देकर लोग कैसे ठगी का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ओटीपी या QR कोड के जरिए भुगतान की मांग नहीं करते।

इसके बावजूद लोग जानकारी के अभाव में ऐसे कॉल पर भरोसा कर लेते हैं। इसी कारण साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।


पुलिस की नागरिकों से अपील

फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें। कम ब्याज दर या तुरंत लोन मिलने जैसे दावों पर भरोसा करने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक शाखा से पुष्टि जरूर करें।

पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि किसी को साइबर ठगी का शक हो, तो तुरंत साइबर थाना या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।


सतर्कता से ही बचाव संभव

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। ओटीपी, पिन और क्यूआर कोड से जुड़े लेनदेन में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

समय पर शिकायत करने से न केवल नुकसान को कम किया जा सकता है, बल्कि आरोपियों तक पहुंचने में भी मदद मिलती है।

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