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फरीदाबाद, 04 फ़रवरी 2026

केंद्रीय बजट 2026–27 पर चर्चा को लेकर फरीदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं फरीदाबाद विधायक विपुल गोयल ने बजट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। यह संवाद सेक्टर-16 स्थित सागर सिनेमा कार्यालय में हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस का फोकस बजट में प्रस्तावित नीतिगत बदलावों, आर्थिक प्राथमिकताओं और उनके संभावित प्रभावों पर रहा, विशेष रूप से हरियाणा और फरीदाबाद के संदर्भ में।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत विचारों को तथ्यात्मक संदर्भ में रखते हुए बताया गया कि बजट दस्तावेज़ में विकास, वित्तीय अनुशासन और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। वक्तव्यों में बजट के लक्ष्यों और प्रस्तावों का उल्लेख किया गया, जबकि किसी प्रकार की औपचारिक घोषणा या नीति परिवर्तन की जानकारी साझा नहीं की गई।


बजट 2026–27 पर प्रस्तुत दृष्टिकोण

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहा गया कि बजट 2026–27 में नीतिगत सुधारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वक्तव्य के अनुसार, सरकार का उद्देश्य नीतियों को ऐसे ढंग से लागू करना है कि उनके परिणाम आम नागरिकों के दैनिक जीवन में दिखाई दें। इस संदर्भ में “Reforms over Rhetoric” जैसे शब्दों का उल्लेख किया गया, जिसे नीतिगत भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह भी कहा गया कि बजट में प्रस्तावित उपायों का लक्ष्य दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता, निवेश को प्रोत्साहन और समावेशी विकास को आगे बढ़ाना है। हालांकि, इन बिंदुओं को नीति-दृष्टिकोण के रूप में रखा गया और किसी विशिष्ट परियोजना या समय-सीमा की घोषणा नहीं की गई।


वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक व्यय

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्तीय अनुशासन के पहलू पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के एक निश्चित दायरे में रखने का प्रयास किया गया है। इस संदर्भ में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय का उल्लेख किया गया, जिसे अवसंरचना और दीर्घकालिक संपत्तियों के निर्माण से जोड़कर देखा गया।

वक्तव्य के अनुसार, पूंजीगत व्यय का उद्देश्य केवल अल्पकालिक खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए आधार तैयार करना है। साथ ही यह भी कहा गया कि वित्तीय संतुलन बनाए रखना बजट की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।


उद्योग और विनिर्माण से जुड़े बिंदु

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों पर भी बात रखी गई। वक्ता के अनुसार, बजट में बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल, रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन क्षेत्रों को रणनीतिक महत्व के रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह भी कहा गया कि इन क्षेत्रों में निवेश से आयात निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन बिंदुओं को संभावनाओं के रूप में रखा गया और किसी विशिष्ट निवेश योजना का विवरण नहीं दिया गया।


लघु और मध्यम उद्योगों पर प्रभाव

लघु और मध्यम उद्योगों (SMEs) के संदर्भ में यह कहा गया कि बजट में उनके लिए वित्तीय सहायता और प्रक्रियात्मक सुधारों का उल्लेख है। वक्तव्य के अनुसार, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और वित्त तक पहुंच को बेहतर करने जैसे उपायों पर ध्यान दिया गया है।

बताया गया कि इन कदमों का उद्देश्य छोटे शहरों और कस्बों में व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाना है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि इन प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।


अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स

अवसंरचना को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, राष्ट्रीय जलमार्ग, कोस्टल कार्गो और इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी जैसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया। वक्तव्य में कहा गया कि ऐसे उपायों से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने में सहायता मिल सकती है।

इन प्रस्तावों को रोजगार सृजन और व्यापारिक गतिविधियों से जोड़कर देखा गया, हालांकि किसी विशिष्ट क्षेत्र या परियोजना के लिए ठोस समय-सीमा साझा नहीं की गई।


शहरी विकास और कनेक्टिविटी

शहरी विकास के संदर्भ में कहा गया कि बजट में कनेक्टिविटी और परिवहन अवसंरचना पर ध्यान दिया गया है। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसे प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इससे व्यापार, पर्यटन और सेवा क्षेत्र को गति मिल सकती है।

इसके साथ ही शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की बात भी रखी गई। वक्तव्य के अनुसार, इसका उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक कौशल से जोड़ना है, ताकि वे रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।


कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

कृषि और ग्रामीण भारत से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा करते हुए यह कहा गया कि बजट में आधुनिक तकनीक, जल संसाधन विकास, पशुपालन, डेयरी और बाजार से जुड़ाव पर ध्यान देने की बात की गई है। AI आधारित सलाह और डिजिटल समाधान जैसे शब्दों का उल्लेख किया गया।

वक्तव्य में कहा गया कि इन उपायों से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसे नीति-स्तर के दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया।


महिला सशक्तिकरण और सामाजिक क्षेत्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया। स्वयं सहायता समूहों, बाजार से जुड़ाव और उद्यमिता आधारित योजनाओं को महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साधन के रूप में बताया गया।

इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाओं और ट्रॉमा केयर से जुड़े प्रावधानों का जिक्र किया गया। वक्तव्य में कहा गया कि इन कदमों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाना है।


डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीक

डिजिटल अर्थव्यवस्था के संदर्भ में IT सेवाओं और डेटा सेंटर से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया। वक्तव्य के अनुसार, इन उपायों को डिजिटल अवसंरचना के विस्तार से जोड़ा गया है।

बताया गया कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार से तकनीकी क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसे दीर्घकालिक संभावनाओं के रूप में रखा गया।


हरियाणा और फरीदाबाद के लिए संभावित प्रभाव

हरियाणा के संदर्भ में कहा गया कि बजट में औद्योगिक क्षेत्रों और कनेक्टिविटी से जुड़े प्रस्ताव राज्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक और हिसार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख औद्योगिक गतिविधियों के केंद्रों के रूप में किया गया।

वक्तव्य में कहा गया कि बेहतर कनेक्टिविटी से NCR क्षेत्र के साथ संपर्क मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही कृषि, खेल, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास के क्षेत्रों में अवसरों की बात भी रखी गई।


समापन वक्तव्य का संदर्भ

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में यह कहा गया कि बजट 2026–27 को परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। वक्तव्य के अनुसार, इसका उद्देश्य निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

यह भी स्पष्ट किया गया कि बजट प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन और समय के साथ सामने आएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य बजट से जुड़े बिंदुओं पर संवाद स्थापित करना रहा।

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