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संघ के शताब्दी वर्ष व पंच परिवर्तन की समाज निर्माण में भूमिका पर संगोष्ठी संपन्न

समाज निर्माण में न्याय और राष्ट्रवाद का सामंजस्य आवश्यक: दीपक ठकराल

बल्लभगढ़, 18 जनवरी |
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नागरिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष व पंच परिवर्तन की समाज निर्माण में भूमिका’ रहा।

कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध जन, गणमान्य नागरिक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
सभी ने राष्ट्र निर्माण के इस सामाजिक अभियान में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।


पंच परिवर्तन के लक्ष्यों पर प्रकाश

सेक्टर-3 स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित इस विचार गोष्ठी में
आईएमटी अध्यक्ष एवं उद्योगपति हेमंत कुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन में
‘पंच परिवर्तन’ के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष समाज को सकारात्मक दिशा देने का अवसर है।
इस दौरान पंच परिवर्तन को जीवनशैली में अपनाना समय की आवश्यकता है।


समाज निर्माण में न्याय और राष्ट्रवाद का संतुलन जरूरी

मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक ठकराल ने संबोधन किया।
उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा राष्ट्र को परम वैभव तक पहुँचाने का संकल्प है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज निर्माण में न्याय और राष्ट्रवाद का सामंजस्य अत्यंत आवश्यक है।
उनके अनुसार, शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं है,
बल्कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और कर्तव्यों को समझने का समय है।


पंच परिवर्तन भारत को वैश्विक मार्गदर्शक बनाएंगे: सत्येंद्र सोरोत

स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक सत्येंद्र सोरोत ने पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।
उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण,
स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य की महत्ता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि समाज निर्माण के लिए स्वदेशी को अपनाना अनिवार्य है।
उनके अनुसार, यही पांच परिवर्तन आने वाले समय में भारत को
वैश्विक मंच पर एक सशक्त मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करेंगे।


प्रबुद्धजनों ने भी रखे अपने विचार

कार्यक्रम में प्रो. पवन सिंह, डॉ. जगदीश चौधरी, विजय, सुनील मित्तल और उदयवीर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
मंच संचालन रेनू आर्य द्वारा किया गया।

इस अवसर पर प्रचार विभाग द्वारा लगाई गई साहित्य स्टॉल का भी अवलोकन किया गया।
संगोष्ठी के बाद लोगों ने देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से संबंधित पुस्तकों की खरीदारी की।


आयोजन में रहा विशेष सहयोग

इस आयोजन को सफल बनाने में विजयपाल और संजय का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम ने समाज में राष्ट्रभावना और सकारात्मक विचारों के प्रसार को नई दिशा दी।

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