फरीदाबाद 23-02-25
फरीदाबाद में क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर की गई ऑनलाइन ठगी के एक मामले में साइबर थाना सैंट्रल की टीम ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई जांच के आधार पर की गई। पुलिस के अनुसार आरोपियों पर 56,894 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला सराय ख्वाजा क्षेत्र के एक निवासी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने बताया कि 27 सितम्बर 2025 को उसके पास एक फोन कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को क्रेडिट कार्ड विभाग से जुड़ा कर्मचारी बताया और कार्ड की लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया। बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता को एक लिंक भेजा गया और उस लिंक पर उसकी क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी भरवाई गई। जानकारी दर्ज करने के तुरंत बाद उसके खाते से 56,894 रुपये की राशि कट गई।
शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर थाना सैंट्रल ने मामले में जांच प्रारंभ की। तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच के आधार पर दो व्यक्तियों की पहचान की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान परमजीत निवासी तिलक विहार, नई दिल्ली और हरजीत सैनी निवासी कादीपुर, दिल्ली हाल झिलमिल कॉलोनी, शाहदरा दिल्ली के रूप में हुई है। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे टेलीग्राम के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से शिकायतकर्ता से संपर्क कर क्रेडिट कार्ड की जानकारी प्राप्त की। प्राप्त जानकारी का उपयोग कर ऑनलाइन सामान ऑर्डर किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इस तरह की गतिविधियों में अन्य व्यक्ति भी शामिल हैं और क्या इससे जुड़े अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।
साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी जांच की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई गतिविधियों का रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्य जांच में सहायक होते हैं। इस मामले में भी पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण होता है, जिससे धनराशि की रिकवरी और अपराधियों की पहचान में मदद मिल सकती है।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। अदालत से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस उनसे यह जानने का प्रयास करेगी कि उन्होंने इस प्रकार की गतिविधि कब से शुरू की, कितने लोगों को निशाना बनाया गया और अवैध तरीके से प्राप्त धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या कोई संगठित नेटवर्क इस प्रकार की धोखाधड़ी में सक्रिय है।
साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के बीच इस प्रकार के मामलों ने लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश के माध्यम से प्राप्त लिंक पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। क्रेडिट कार्ड, ओटीपी, सीवीवी और अन्य गोपनीय विवरण साझा करने से वित्तीय जोखिम उत्पन्न हो सकता है। बैंक और वित्तीय संस्थान आमतौर पर ग्राहकों से इस प्रकार की जानकारी फोन या संदेश के माध्यम से नहीं मांगते।
पुलिस विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, ईमेल या संदेश के प्रति सावधानी बरतें। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर जानकारी मांगता है, तो पहले आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर पर संपर्क कर पुष्टि करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत संबंधित साइबर थाने या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान सुविधाओं ने जहां सुविधा प्रदान की है, वहीं धोखाधड़ी के नए तरीके भी सामने आए हैं। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, केवाईसी अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी और निवेश से जुड़े प्रलोभन जैसे मामलों में लोगों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही प्राथमिक सुरक्षा उपाय माने जाते हैं।
वर्तमान मामले में जांच एजेंसियां आरोपियों के डिजिटल उपकरणों की भी जांच कर सकती हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से प्राप्त डाटा जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किन-किन खातों या प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया और क्या अन्य संभावित पीड़ित भी हैं। यदि अन्य मामलों का पता चलता है तो संबंधित व्यक्तियों से संपर्क किया जा सकता है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध की रोकथाम के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है। साइबर थाना सैंट्रल सहित अन्य इकाइयों को डिजिटल जांच के लिए विशेष उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के प्रयास भी किए जाते हैं।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है। पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि की जाए और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जाएं। कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोप-पत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और गवाही के आधार पर किया जाएगा।
इस घटना ने यह स्पष्ट किया है कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में सतर्कता आवश्यक है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राप्त किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। विशेष रूप से वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहिए। पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली सलाह और दिशा-निर्देशों का पालन करना उपयोगी हो सकता है।
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने बैंकिंग और व्यक्तिगत विवरण सुरक्षित रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

