नेहरू कॉलेज की प्राचार्या एक बार फिर सस्पेंड, लाखों रुपए के गबन के आरोप : अत्री
SDM की रिपोर्ट पर सवाल—एकपक्षीय व नॉन-स्पीकिंग तरीके से बंद की गई शिकायत
फरीदाबाद। हरियाणा युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं छात्र नेता कृष्ण अत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। वह सेक्टर-16ए स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू कॉलेज के बाहर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
अत्री ने बताया कि लाखों रुपए के गबन के आरोपों में कॉलेज की प्राचार्या रुचिरा खुल्लर को 27 मार्च 2026 को विजिलेंस विभाग द्वारा एक बार फिर सस्पेंड किया गया है।
उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर 2024 को दायर आरटीआई के माध्यम से कॉलेज में कई वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था, जिनमें फाइन संग्रह, कबाड़ बिक्री, निजी कंपनियों से प्राप्त दान, हिंदी सेमिनार के भोजन बिल तथा क्लर्क नियुक्ति में गड़बड़ियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि 19 दिसंबर 2024 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मंत्री विपुल गोयल, एंटी करप्शन ब्यूरो और लोकायुक्त सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायत भेजकर जांच की मांग की गई थी। इसके बाद 3 जनवरी 2025 को एंटी करप्शन ब्यूरो ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि इस मामले में जांच की जा रही है, जबकि जिला उपायुक्त स्तर पर भी जांच जारी रही।
कृष्ण अत्री ने कहा कि जिला उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की गई। इसके बाद 18 जून 2025 को मुख्यमंत्री व राज्यपाल को पुनः शिकायत भेजी गई। वहीं 2 जुलाई 2025 को एसीबी ने ई-मेल के माध्यम से फिर से जानकारी दी कि इस मामले में जांच पहले से जारी है।
उन्होंने कहा कि संतोषजनक कार्रवाई न होने पर उन्होंने सितंबर 2025 में हाईकोर्ट का रुख किया, जिस पर माननीय न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को निर्धारित है।
कृष्ण अत्री ने बताया कि प्राचार्या रुचिरा खुल्लर का 22 अगस्त 2024 को प्रशासनिक आधार पर तिगांव के सरकारी कॉलेज में ट्रांसफर किया गया था, जिसके बाद जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आने पर 28 अगस्त 2024 को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चल रही जांच के दौरान ही प्राचार्या को पुनः बहाल कर दिया गया और बाद में 24 अप्रैल 2025 को पब्लिक इंट्रेस्ट का हवाला देते हुए उन्हें उसी कॉलेज में दोबारा नियुक्त कर दिया गया, जहां उनके खिलाफ आरोप लगे थे।
अत्री ने एसडीएम की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां एक ओर उच्च शिक्षा अधिकारी ने वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की, वहीं दूसरी ओर एसडीएम ने मामले को केवल लापरवाही बताकर बंद कर दिया। उन्होंने इस रिपोर्ट को अनियमित, एकपक्षीय और नॉन-स्पीकिंग बताया और इसकी शिकायत मंडलायुक्त से भी की है। उन्होंने आशंका जताई कि प्राचार्या द्वारा पुनः कॉलेज में ट्रांसफर के बाद साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया हो सकता है। साथ ही बताया कि एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर प्राचार्या ने उनके खिलाफ 10 लाख रुपये का मानहानि का दावा भी दायर किया है।
अंत में कृष्ण अत्री ने कहा कि जब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
इस दौरान निपुण पंडित, ध्रुव चौहान, सतविंदर सिंह, राहुल वर्मा, ऋतिक दास, शोएब, हैप्पी राजपूत सहित अन्य साथी मौजूद रहे।

