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फरीदाबाद | 2 फरवरी 2026

सराय ख्वाजा क्षेत्र स्थित राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सामाजिक सरोकार से जुड़ा एक सराहनीय आयोजन देखने को मिला, जहां गरीब और जरूरतमंद स्कूली बच्चों को सर्दी से राहत देने के उद्देश्य से गर्म जर्सियों का वितरण किया गया। यह पहल विद्यालय के पूर्व छात्र एवं जिला शिकायत निवारण समिति के सदस्य देवेन्द्र अग्रवाल (देबू भाई) के सहयोग से संपन्न हुई।

इस अवसर पर लगभग 251 जरूरतमंद विद्यार्थियों को गर्म जर्सियां प्रदान की गईं, जिससे ठंड के मौसम में बच्चों को राहत मिल सके और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।


सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना कार्यक्रम

यह आयोजन केवल वस्त्र वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से समाज में सामूहिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं का संदेश भी दिया गया। देवेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के जीवन में सहयोग, संस्कार और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने बताया कि एक पूर्व छात्र के रूप में अपने विद्यालय में लौटकर बच्चों के लिए कुछ करना उनके लिए भावनात्मक और गर्व का विषय है। इस तरह की पहल से समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है।


स्कूल के पुराने दिनों को किया याद

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेन्द्र अग्रवाल ने अपने स्कूल जीवन की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि पहले के स्कूल के दिन सादगी, मित्रता और गुरूजनों के प्रति सम्मान से भरे होते थे। उस समय दोस्ती में अपनापन था और शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के मार्गदर्शक हुआ करते थे।

उन्होंने कहा कि समय के साथ जीवनशैली बदली है और इसका सीधा असर बच्चों के व्यवहार और सोच पर भी दिखाई देता है। ऐसे में समाज और परिवार दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को सही दिशा दें।


बच्चों में संस्कार विकसित करने की आवश्यकता

देवेन्द्र अग्रवाल ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज की युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कारों की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिवारों में आपसी जुड़ाव कम होता जा रहा है, जिसका प्रभाव बच्चों की मानसिकता पर पड़ रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले बच्चे चीजों को आपस में साझा करना सीखते थे, जबकि आज हर बच्चे के पास अलग-अलग वस्तुएं होती हैं। साझा करने की आदत से बच्चों में सहयोग, धैर्य और समझदारी जैसे गुण विकसित होते हैं, जो उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं।


शिक्षा को आनंददायी बनाने पर जोर

अपने विचार रखते हुए देवेन्द्र अग्रवाल ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर भी संतुलित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि पढ़ाई बच्चों के लिए नीरस और बोझिल हो जाएगी, तो उनका रुझान शिक्षा से कम होने लगेगा। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा को आनंददायी और व्यवहारिक बनाया जाए।


शिक्षकों की भूमिका अहम

उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अध्यापकों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ रचनात्मक और वैकल्पिक शिक्षण विधियों को अपनाना चाहिए। इससे बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी और वे पढ़ाई को दबाव के बजाय एक सकारात्मक अनुभव के रूप में लेंगे।

उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षकों को नई-नई तकनीकों, गतिविधियों और उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने के तरीके खोजने चाहिए, ताकि शिक्षा जीवन से जुड़ी हुई लगे।


विद्यालय परिवार और गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर विद्यालय परिवार और क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बुुद्ध प्रकाश तायल, दिनेश, कालू सेठ, शिव कुमार गर्ग, सचिन मंगला, सुशील यादव, मुकेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, जितेन्द्र गर्ग, संजीव कंसल सहित अन्य सामाजिक व्यक्ति मौजूद रहे।

विद्यालय के प्रधानाचार्य कैलाश तथा अध्यापिका रजनी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और इस पहल के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।


बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी

जर्सी वितरण के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ नजर आया। ठंड के मौसम में गर्म कपड़े मिलने से बच्चों ने राहत महसूस की और उन्होंने इस सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें यह महसूस कराते हैं कि समाज उनके साथ खड़ा है।


समाज में सकारात्मक संदेश

यह आयोजन समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जरूरतमंद बच्चों की मदद न केवल उनकी तात्कालिक जरूरतें पूरी करती है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती है।

सामाजिक कार्यों से जुड़े लोगों का मानना है कि शिक्षा और सेवा को जोड़कर किए गए प्रयास समाज को मजबूत बनाते हैं।


भविष्य में भी जारी रखने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में देवेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि वे भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों से जुड़े रहेंगे। उनका मानना है कि यदि समाज के सक्षम लोग आगे आकर सहयोग करें, तो किसी भी बच्चे को अभाव के कारण अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं करना पड़ेगा।

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