फरीदाबाद, 17 फरवरी 2026
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में एक चुनौतीपूर्ण हिप रिवीजन सर्जरी के बाद, 47 वर्षीय महिला अब फिर से सामान्य तरीके से चलने में सक्षम हो गई हैं। करीब 40 सालों तक मोबिलिटी की गंभीर समस्या से जूझने वाली इस मरीज के लिए यह सर्जरी सिर्फ एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके लिए एक नई जीवन शुरुआत भी है।
इस मरीज की किशोरावस्था में दाएं कूल्हे की सर्जरी की गई थी। बचपन में एक गिरने के कारण उनके कूल्हे में गंभीर चोट आई थी, जिसके लिए प्लेट और स्क्रू लगाए गए थे। उस वक्त की गई सर्जरी ने तत्काल समस्या को तो सुलझा दिया, लेकिन इसके बाद से वह करीब 35 साल तक उन्हीं इंप्लांट्स के सहारे जीवन जीने को मजबूर रहीं। वक्त के साथ वो पुराने मेटल इंप्लांट्स भी खराब होने लगे, जिससे दर्द, अकड़न और चलने में कठिनाई बढ़ती गई।
मरीज ने बताया कि पिछले कई वर्षों से उनके लिए साधारण गतिविधियां भी काफी मुश्किल हो गई थीं। सीढ़ियां चढ़ना, लंबी दूरी तक चलना या यहां तक कि रोजमर्रा के काम भी बहुत दर्द के कारण कठिन हो गए थे। समस्या तब और गंभीर हो गई जब कूल्हे का जोड़ अपनी प्राकृतिक स्थिति से हटने लगा और जॉइंट स्पेस लगभग खत्म हो गया।
अंत में उन्होंने फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद में विशेषज्ञ उपचार की तलाश की। यहां, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने एक विस्तृत जांच की। एक्स-रे और अन्य टेस्ट से पता चला कि दाएं कूल्हे में लगे पुराने मेटल इंप्लांट्स गंभीर रूप से खराब हो चुके थे। फीमरल हेड और नेक के आस-पास हड्डी का काफी नुकसान हो गया था, और पिछली सर्जरी के कारण बने स्कार टिश्यू ने स्थिति को और जटिल बना दिया था।
डॉक्टरों का कहना है कि रिवीजन हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी अक्सर पहले की हिप रिप्लेसमेंट की तुलना में ज्यादा जटिल होती है। इसमें पुराने इंप्लांट्स को सावधानी से हटाना, कमजोर हड्डियों का पुनर्निर्माण करना और नए जॉइंट को सटीक तरीके से स्थापित करना शामिल होता है। थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में जटिलताओं का कारण बन सकती है।
करीब तीन घंटे तक चली इस सर्जरी में विशेषज्ञ टीम ने पुरानी प्लेटों और स्क्रू को सफलतापूर्वक निकाला। इसके बाद, एक नया हिप जॉइंट बहुत सटीकता के साथ प्रत्यारोपित किया गया। प्रोसेस के दौरान रक्तस्राव, संक्रमण और अन्य जोखिमों पर भी खास ध्यान रखा गया। सर्जरी सफल रही और मरीज को चार दिन बाद अस्पताल से स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि लंबे समय से मौजूद इंप्लांट्स के कारण हड्डी का ढांचा कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा, “रिवीजन हिप रिप्लेसमेंट में सर्जिकल कौशल और आधुनिक तकनीक का सही समन्वय बेहद जरूरी होता है। हमें पुराने इंप्लांट्स को सावधानी से हटाना था और नए जॉइंट को सही स्थिति में स्थापित करना था ताकि मरीज को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।”
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। अब वो बिना अत्यधिक दर्द के चलने में सक्षम हैं। फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यम से उनकी मांसपेशियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि वे फिर से पूरी तरह से सक्रिय जीवन जी सकें।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर, डॉ. अभिषेक शर्मा ने बताया कि इस तरह के मामले आधुनिक ऑर्थोपेडिक देखभाल की क्षमता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “दशकों पुराने इंप्लांट्स और गंभीर क्षरण वाले मामलों में रिवीजन सर्जरी करना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। हमारी टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता के माध्यम से मरीज को नई मोबिलिटी दी है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर चिकित्सा परामर्श और सही उपचार से जॉइंट्स से जुड़ी पुरानी समस्याओं का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है। अक्सर मरीज लंबे समय तक दर्द को सहते रहते हैं और विशेषज्ञ से परामर्श नहीं लेते, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है। इस मामले ने साबित कर दिया है कि उन्नत जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक और अनुभवी सर्जिकल टीम के सहयोग से जटिल परिस्थितियों में भी सकारात्मक परिणाम संभव हैं।
मरीज के परिवार ने अस्पताल की टीम का आभार व्यक्त किया और कहा कि वर्षों से चली आ रही पीड़ा से मुक्ति पाना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। अब मरीज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं और सामान्य जीवन जीने के लिए कदम बढ़ा रही हैं।
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड भारत की एक प्रमुख एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता है। कंपनी देशभर में अस्पताल, डायग्नॉस्टिक्स और डे-केयर सेवाएं चलाती है। वर्तमान में यह 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 33 स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ काम कर रही है। इसके नेटवर्क में 5,700 से अधिक ऑपरेशनल बेड और 400 से ज्यादा डायग्नॉस्टिक लैब्स शामिल हैं।
फरीदाबाद स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में आधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीकों और विशेषज्ञ टीम के माध्यम से जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा रहा है। यह हालिया सफलता एक बार फिर यह दिखाती है कि समर्पण, विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के जरिए दशकों पुरानी इममोबिलिटी को भी दूर किया जा सकता है, जिससे मरीज को स्वतंत्र और सक्रिय जीवन जीने का अवसर मिल सकता है।

