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फरीदाबाद 23-02-25

फरीदाबाद में गोदाम से मसाले चोरी कर उन्हें बाजार में बेचने के एक मामले में अपराध शाखा ऊंचा गांव की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पूर्व में दर्ज एक शिकायत और उसके आधार पर की गई जांच के परिणामस्वरूप की गई। मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शान हास्मी निवासी डबुआ कॉलोनी तथा प्रिंस मौर्य निवासी गांव विष्णुपुर पिपरई, जिला गाजीपुर (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी डबुआ कॉलोनी, फरीदाबाद के रूप में हुई है। दोनों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर इनकी भूमिका सामने आई।

मामले की शुरुआत पुलिस चौकी पर्वतीय कॉलोनी में दर्ज एक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता मनीष निवासी जवाहर कॉलोनी ने बताया कि वह एक मसाला ब्रांड का डिस्ट्रीब्यूटर है और पिछले कुछ समय से उसके गोदाम से मसाले लगातार गायब हो रहे थे। प्रारंभिक स्तर पर स्टॉक की जांच की गई तो माल की कमी सामने आई। इसके बाद मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। थाना सारन में संबंधित धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया गया और जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने गोदाम में कार्यरत कर्मचारियों से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि गोदाम में कार्यरत अंशु और योगेश ने कथित रूप से मसाले चोरी कर उन्हें बाहर बेचने की योजना बनाई थी। पुलिस के अनुसार अंशु और योगेश ने चोरी किया गया माल आरोपी शान के माध्यम से प्रिंस को बेचने के लिए दिया। प्रिंस, जो कथित रूप से सेल्समैन के रूप में कार्य करता था, ने आगे इन मसालों को एक दुकानदार को बेच दिया।

पुलिस ने बताया कि अंशु और योगेश को 21 जनवरी को ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप शान और प्रिंस की संलिप्तता सामने आई। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यदि अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

गोदामों में होने वाली चोरी की घटनाएं व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं। इस प्रकार के मामलों में आंतरिक निगरानी, स्टॉक प्रबंधन और नियमित ऑडिट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच जैसे उपायों से इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम की जा सकती है।

वर्तमान मामले में पुलिस ने गोदाम के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच की। इसके अलावा संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया गया। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ी जोड़ी गई। पुलिस का कहना है कि चोरी किए गए मसालों की मात्रा और उनकी बाजार में बिक्री से संबंधित विवरण की भी पुष्टि की जा रही है।

आरोपी प्रिंस को माननीय अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि उससे पूछताछ कर यह स्पष्ट किया जा सके कि चोरी के माल की बिक्री किन-किन स्थानों पर की गई और उससे प्राप्त धनराशि का वितरण कैसे हुआ। वहीं आरोपी शान को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। अदालत की निगरानी में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में साक्ष्यों का संकलन और जांच प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण उपलब्ध तथ्यों और गवाहों के आधार पर किया जाता है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा। इसलिए जांच के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए यह मामला सतर्कता का संकेत माना जा सकता है। गोदामों और वितरण केंद्रों में नियमित स्टॉक सत्यापन, कर्मचारियों की गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई दे तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

फरीदाबाद पुलिस ने यह भी कहा है कि अपराध और अपराधियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न इकाइयों द्वारा नियमित कार्रवाई की जाती है। अपराध शाखा की टीमों को विशेष रूप से संगठित और आर्थिक अपराधों की जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

मामले की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि चोरी की घटनाएं कितने समय से चल रही थीं और क्या स्टॉक की कमी पहले भी दर्ज की गई थी। यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित दुकानदार से भी पूछताछ की जा सकती है, जिसने कथित रूप से मसाले खरीदे थे। इससे चोरी के माल की अंतिम गंतव्य की पुष्टि हो सकेगी।

आर्थिक अपराधों में अक्सर कई स्तरों पर व्यक्तियों की भूमिका होती है। इस मामले में भी पुलिस प्रत्येक स्तर की जांच कर रही है, ताकि पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके। चोरी किए गए माल की बरामदगी के प्रयास भी किए जा रहे हैं। यदि माल बाजार में बेचा जा चुका है, तो उसकी रिकवरी और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच की जाएगी।

पुलिस ने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें। सामुदायिक सहयोग से अपराध की रोकथाम में सहायता मिल सकती है। साथ ही, कर्मचारियों के चयन और निगरानी में पारदर्शिता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

फिलहाल दोनों आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जारी है। आगे की जांच और पूछताछ के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आरोप-पत्र दाखिल किया जाएगा। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

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