फरीदाबाद, 23 फरवरी। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि मनरेगा योजना को कमजोर कर खत्म करने की साजिश और करीब 14 लाख बीपीएल कार्ड काटे जाने के विरोध में 25 फरवरी को हरियाणा विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला कर रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान हरियाणा में देश की सबसे अधिक मजदूरी दी जाती थी, लेकिन बीजेपी के सत्ता में आते ही मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात शुरू हो गया। संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक पंजीकृत मनरेगा मजदूरों में से वर्ष 2024–25 में महज़ 2,191 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। उन्होंने यह भी बताया कि मनरेगा कानून के तहत तय बेरोज़गारी भत्ता पिछले पाँच वर्षों में राज्य के एक भी मजदूर को नहीं दिया गया।

सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले हरियाणा की करीब 75 प्रतिशत आबादी को झूठे सब्ज़बाग दिखाकर बीपीएल राशन कार्ड बनाए गए—लोकसभा चुनाव तक इनकी संख्या 45 लाख और विधानसभा चुनाव तक 51.09 लाख पहुंचा दी गई। बाद में सत्ता में आते ही लगभग 14 लाख बीपीएल कार्ड काट दिए गए। इससे साफ है कि राजनीतिक लाभ के लिए जनता को गुमराह किया गया और अब गरीबों को सरकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पूंजीपतियों के हित साधने वाली नीतियों के खिलाफ कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

इस मौके पर पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह साबित करता है कि सत्ता में बैठे नेता और अफसर किस तरह जनता की कमाई डकार रहे हैं। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की अध्यक्षता में कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

नीरज शर्मा ने बताया कि वर्ष 2012–13 में कांग्रेस सरकार ने निजी बैंकों में सरकारी धन जमा करने से जुड़े जोखिमों को देखते हुए अतिरिक्त राशि ट्रेजरी में रखने और केवल सरकारी बैंकों में ही जमा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन बीजेपी सरकार के दौरान इन सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर कर निजी बैंकों में करोड़ों रुपये जमा कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी स्वार्थों और नेताओं–अधिकारियों की मिलीभगत से एक ही बैंक शाखा में तय सीमा से अधिक राशि रखी गई, जिससे IDFC Bank में हरियाणा की जनता के 590 करोड़ रुपये डूब गए।

उन्होंने सरकार से समयबद्ध जांच, जिम्मेदार मंत्रियों व अधिकारियों को पद से हटाने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि किसके संरक्षण में नियमों की अनदेखी हुई तथा किन परिजनों को निजी बैंकों में नौकरियां या अन्य लाभ दिलाए गए।

अंत में दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार अगर जनता को दरकिनार कर फैसले लेती रही तो मजबूत विपक्ष हर मोर्चे पर जवाब देगा—गरीबों के हक पर किसी भी सूरत में डाका नहीं डालने दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *