फरीदाबाद, 17 फरवरी 2026
जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए में 18-19 फरवरी 2026 को होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग: नैरेटिव्स, डिस्कोर्स एंड डिसेमिनेशन (टीएस-26)” की तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक गतिविधियाँ तेजी से चल रही हैं और देश-विदेश से आने वाले प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए जा रहे हैं। इस सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड मोड में होगा, जिससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से विद्वानों, शोधार्थियों और छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
साहित्य एवं भाषा विभाग की अध्यक्षा प्रो. दिव्यज्योति सिंह ने बताया कि “ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग” का विषय आज के डिजिटल युग में बेहद प्रासंगिक है। कहानी कहने की परंपरा अब सिर्फ किताबों या मौखिक माध्यमों तक सीमित नहीं रह गई है; आज ये सिनेमा, वेब सीरीज, सोशल मीडिया, डिजिटल गेमिंग, पॉडकास्ट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य इंटरएक्टिव माध्यमों में फैली हुई हैं। इस पार्श्वभूमि में, कथानक निर्माण, उसका प्रसार और इसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर गहराई से विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बहुआयामी कथानक संरचनाओं और उनके वैश्विक प्रभावों पर गहन चर्चा के लिए एक अकादमिक मंच प्रदान करना है। इसमें साहित्य, मीडिया अध्ययन, संचार, विधि, सांस्कृतिक अध्ययन और तकनीक जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान भाग लेंगे। इस तरह, यह आयोजन अंतःविषयक संवाद को बढ़ावा देगा और नए शोध के आयाम सामने लाएगा।
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 18 फरवरी को सुबह 10:00 बजे विश्वविद्यालय के सभागार में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, द्वारका के सेंटर फॉर लिंग्विस्टिक जस्टिस एंड एंडेंजर्ड लैंग्वेजेस के निदेशक प्रो. प्रसन्नांशु मौजूद रहेंगे। अध्यक्षीय संबोधन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. भीम सिंह दहिया देंगे।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने बताया कि ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग आज के समय का एक गतिशील और प्रभावशाली विषय है, जो हमारे संप्रेषण, चिंतन और सामाजिक सहभागिता को गहराई से प्रभावित करता है। आज की कहानियाँ केवल एक माध्यम में नहीं रहतीं, बल्कि विभिन्न प्लेटफॉर्मों के जरिये समाज के बड़े हिस्से तक पहुँचती हैं। इसलिए, इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद करना बेहद जरूरी है।
इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान अपने शोधपत्र और व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. मार्गिट कोवेस, कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए के प्रो. डेविड ब्लूमेनक्रांत्ज़, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के प्रो. अहमर महबूब, यूक्रेन की प्रो. इयूलिया शमायेवा और पोलैंड की डॉ. अन्ना एम. कुज़ियो अपने विचार ऑनलाइन साझा करेंगे। इन अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं की सहभागिता से सम्मेलन का वैश्विक दृष्टिकोण और भी मजबूत होगा।
इन दो दिनों में कई प्लेनरी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें “नैरेटिव और विमर्श”, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संदर्भ में कथ्य”, “यूरोप और वैश्विक परिप्रेक्ष्य” और “रिटोरिक और प्रभावशीलता” जैसे समकालीन विषयों पर चर्चा होगी। इन सत्रों में कहानी कहने की बदलती तकनीकों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भूमिका, एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव, और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
समानांतर तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों और विद्वानों द्वारा अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इन सत्रों में ट्रांसमीडिया कथानक के संरचनात्मक पहलुओं, डिजिटल विमर्श, सोशल मीडिया के प्रभाव, कानूनी और नैतिक प्रश्नों और वैश्विक संप्रेषण रणनीतियों पर चर्चा होगी। यह मंच युवा शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समुदाय से जुड़ने और अपने विचार साझा करने का एक सुनहरा अवसर देगा।
सम्मेलन के दूसरे दिन, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और शैक्षणिक विमर्श का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। समापन सत्र में सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों और निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी, और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि हाइब्रिड मोड में आयोजन की सभी तकनीकी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। ऑनलाइन प्रतिभागियों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जिससे वे लाइव सत्रों में भाग ले सकें और प्रश्नोत्तर में शामिल हो सकें। ऑफलाइन प्रतिभागियों के लिए सभागार और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी पूरी हो चुकी है।
यह सम्मेलन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए समकालीन मीडिया परिदृश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण मौका है। ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग की अवधारणा अब विज्ञापन, राजनीति, शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक आंदोलनों तक फैली हुई है। ऐसे में इस विषय पर शैक्षणिक विमर्श भविष्य की संचार रणनीतियों को समझने में मदद करेगा।
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक और डिजिटल युग में कहानी कहने की प्रक्रिया केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन और विचार निर्माण का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। अलग-अलग प्लेटफार्मों के जरिए एक ही कथा के विविध रूप सामने आ रहे हैं, जो अलग-अलग दर्शक वर्गों तक पहुंचते हैं।
जे.सी. बोस विश्वविद्यालय का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल अकादमिक उत्कृष्टता का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक शैक्षणिक संवाद में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के विद्वानों की सहभागिता से ज्ञान-विनिमय का एक सशक्त मंच तैयार होगा, और ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग के क्षेत्र में नए शोध और विचारों को उत्तेजित करेगा।

