फरीदाबाद 24-02-25
फरीदाबाद से हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ को चंडीगढ़ में प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व पुलिस द्वारा उनके निवास पर रोके जाने का मामला सामने आया है। यह कार्यक्रम “मनरेगा बचाओ–देश बचाओ” अभियान के तहत आयोजित किया जाना था। संबंधित पक्षों के अनुसार, कार्यक्रम से एक दिन पहले रात से ही उनके निवास स्थान पर पुलिस बल तैनात किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले दिन सुबह तक सुमित गौड़ को घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस संबंध में उन्होंने कहा कि वे हरियाणा कांग्रेस के आह्वान पर अपने समर्थकों के साथ चंडीगढ़ प्रस्थान करने की तैयारी में थे, किंतु उससे पहले ही पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें घर पर ही रोक दिया गया। उन्होंने इसे नज़रबंदी की कार्रवाई बताया।
सुमित गौड़ ने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है। उनका कहना है कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की कार्रवाई जनसंबंधित मुद्दों को उठाने से रोकने का प्रयास प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठाना उनका दायित्व है और वे इसे जारी रखेंगे।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के अधिकार का सम्मान किया जाए। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए। सुमित गौड़ ने यह भी कहा कि वे भविष्य में भी जनहित से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहेंगे।
इस मामले पर कांग्रेस पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई है। पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और शांतिपूर्ण विरोध को प्रतिबंधित करना उचित नहीं माना जाता। पार्टी ने प्रशासन से पारदर्शिता और संवाद की अपेक्षा जताई है।
वहीं, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं हो सका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, हालांकि विशिष्ट मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा सत्र या बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के दृष्टिकोण सामने आते हैं—एक ओर राजनीतिक दल अपने अधिकारों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी का हवाला देता है। अंतिम स्थिति तथ्यों और आधिकारिक बयानों के आधार पर स्पष्ट होती है।
इस घटनाक्रम के बाद सुमित गौड़ ने अपने वक्तव्य में कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखते रहेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि जनहित के मुद्दों को उठाने का प्रयास जारी रहेगा।
फिलहाल मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

