फरीदाबाद । भारत में होली के महापर्व के पावन अवसर पर पाली चौक स्थित जगदंबा मंदिर परिसर में कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल द्वारा भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं पारंपरिक होली उत्सव की मनोहारी झलक प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में लगभग 600 से अधिक परिवारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उत्तराखंडी परंपरा के अनुसार महिलाओं एवं पुरुषों के पारंपरिक जोड़ों के माध्यम से होली गीतों की प्रस्तुति दी गई। कुमाऊं क्षेत्र की विशिष्ट बैठकी होली एवं खड़ी होली की परंपरा को सजीव रूप में मंचित किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस एवं उल्लास से सराबोर हो उठा।
इस अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध पारंपरिक वाद्य यंत्रों — ढोल, दमाऊ, नगाड़ा, रणसिंघा आदि — का विशेष रूप से प्रयोग किया गया। इन वाद्य यंत्रों की गूंज ने कार्यक्रम को पारंपरिक स्वरूप प्रदान करते हुए उपस्थित जनसमूह को उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री दिगंबर सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि “होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल का उद्देश्य उत्तराखंड की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और समाज को अपनी जड़ों से जोड़कर रखना है। आज 600 से अधिक परिवारों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति आज भी जीवंत है और समाज उसे सहेजने के लिए प्रतिबद्ध है।”
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द के साथ एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। पूरा मंदिर परिसर पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों एवं वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से उत्सवमय बना रहा।
कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल ने भविष्य में भी इसी प्रकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जोड़ने और उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल की कार्यकारिणी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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