चार दिवसीय “यजुर्वेद पारायण यज्ञ” का शुभारंभ
फरीदाबाद, 26 मार्च। मर्यादित जीवन जीने वाला व्यक्ति कभी असफल नहीं होता और समाज में अपनी अलग पहचान बनाता है। यह बात दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महामंत्री विनय आर्य ने ग्रेटर फरीदाबाद स्थित श्रद्धा मंदिर स्कूल में आयोजित चार दिवसीय “यजुर्वेद पारायण यज्ञ” के शुभारंभ अवसर पर कही।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मर्यादा में रहकर कार्य करने से व्यक्ति समाज में सम्मान अर्जित करता है और लोगों का चहेता बनता है। उन्होंने कहा कि इतिहास और धार्मिक ग्रंथ इस बात के साक्षी हैं कि जब-जब मर्यादा का उल्लंघन हुआ है, तब-तब व्यक्ति और उसके कुल को हानि उठानी पड़ी है। इसलिए सभी को अपने जीवन में अनुशासन और मर्यादा का पालन करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान यजुर्वेद पारायण यज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने राष्ट्र की समृद्धि और कल्याण की कामना के साथ आहुति दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्मचारी राजेंद्र सिंह ने की।
इस अवसर पर आर्य समाज के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. नरेंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना राष्ट्रभक्ति, पाखंड से मुक्ति और आपसी प्रेम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के अनुयायियों ने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आज भी समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गजराज सिंह आर्य ने सभी विद्वानों का स्वागत करते हुए कहा कि आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आर्य समाज के सिद्धांतों से जोड़ना है, ताकि वे अपने गौरवशाली इतिहास और मूल्यों को समझ सकें।
इस अवसर पर मूलचंद आर्य, राजकुमार आर्य, श्रीमती राजेश, नंदलाल कालड़ा, विमला ग्रोवर, योगेंद्र फोर, हर्षित, सुधीर बंसल, वसुमित्र सत्यार्थी सहित विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधि और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

