फरीदाबाद, 18 फरवरी 2026
हरियाणा सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली नेहरू ग्राउंड लोहा मंडी के व्यापारी आज सड़कों पर उतर आए। लंबे समय से जारी समस्याओं और प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने एकजुट होकर अपने प्रतिष्ठान बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और व्यापारियों को शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ व्यापारियों ने नगर निगम अधिकारियों को लेकर कड़ा रोष व्यक्त किया और अपनी शिकायतें खुलकर सामने रखीं।
नेहरू ग्राउंड स्थित लोहा मंडी को उत्तर भारत की प्रमुख और संगठित आयरन मार्केट में गिना जाता है। यहां से फरीदाबाद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की सैकड़ों इकाइयों को लोहे और स्टील का सामान सप्लाई किया जाता है। व्यापारियों का दावा है कि मंडी हरियाणा में सबसे अधिक टैक्स देने वाले बाजारों में शामिल है, इसके बावजूद उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा।
फरीदाबाद आयरन एंड स्टील ट्रेड्स एसोसिएशन के प्रधान सीपी कालरा ने कहा कि व्यापारी हमेशा विकास के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विकास कार्यों के नाम पर व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी तो वे चुप नहीं बैठ सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी अतिक्रमण के नाम पर तो कभी अन्य कारणों से व्यापारियों को लगातार परेशान किया जा रहा है।
सीपी कालरा ने बताया कि लोहा मंडी में सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन निर्माण की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। उनका कहना है कि सड़क के दोनों ओर एक साथ खुदाई की जा रही है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एक ओर का कार्य पूरा होने के बाद ही दूसरी ओर काम शुरू किया जाए, ताकि यातायात और लोडिंग-अनलोडिंग में बाधा न आए।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत दी गई थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यापारियों की बात सुनने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, व्यापारियों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी उनकी समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दे रहे।
एसोसिएशन के उपप्रधान मुकेश बंसल ने कहा कि नेहरू ग्राउंड में पिछले 55 वर्षों से लोहा व्यापार संचालित हो रहा है और यह पूरी तरह से कमर्शियल मार्केट है। उन्होंने कहा कि यहां देश की प्रमुख स्टील कंपनियों—टाटा, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), जेएसडब्ल्यू और वीएसपी—के स्टॉक यार्ड स्थित हैं, जिससे यह बाजार उत्तर भारत की सबसे बड़ी लोहा मंडियों में से एक के रूप में विकसित हुआ है।
मुकेश बंसल के अनुसार, इस बाजार में लगभग 500 दुकानदार, 2000 मजदूर और करीब 500 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें ड्राइवर और अन्य सहयोगी स्टाफ शामिल हैं। इस प्रकार, लगभग 5000 परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर इस बाजार से जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारियों द्वारा किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है और वे अपनी दुकानों के भीतर ही माल का भंडारण और लेन-देन कर रहे हैं।
कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम केवल अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। उनका कहना है कि सीवर लाइनें लंबे समय से जाम हैं, पार्कों की स्थिति दयनीय है और सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए कोई पहल नहीं की जा रही, तो विकास कार्यों के नाम पर उनकी रोजी-रोटी क्यों प्रभावित की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों ने व्यापारियों से शांति बनाए रखने और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।
व्यापारियों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि विकास योजनाएं चरणबद्ध और व्यवस्थित ढंग से लागू की जाएं, ताकि व्यापार पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि निर्माण कार्यों की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए।
इस अवसर पर एसोसिएशन के महासचिव राकेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष रिंकू बंसल, सहसचिव देवेंद्र गर्ग, कार्यकारिणी सदस्य अमन गुप्ता, अंकुर गोयल, भारत कालरा, बीएस देशवाल, सूयांश लोहिया, विवेक बंसल, रजनीश देवड़ा और वाईडी मेहता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो वे आगे भी आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद की संभावना बनी हुई है। व्यापारिक समुदाय को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेंगे और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे विकास कार्य भी जारी रहें और व्यापार भी प्रभावित न हो।

