फरीदाबाद | नवरात्रि का पांचवां दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। महारानी वैष्णो देवी मंदिर में मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंद माता की भव्य पूजा अर्चना की गई. मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने प्रातः कालीन आरती का शुभारंभ करवाया. इस अवसर पर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े श्रद्धालुओं ने स्कंद माता की पूजा अर्चना में हिस्सा लेकर अपने मन की मुराद मांगी और माता रानी को प्रसाद का भोग लगाया. मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने आए हुई श्रद्धालुओं को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी और माता स्कंद की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि वो ज्ञान, समृद्धि और वात्सल्य की देवी मानी जाती हैं। इस दिन भक्त पीले वस्त्र पहनकर, उन्हें पीले फूल और फल अर्पित कर, संतान सुख और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए विशेष पूजा करते हैं। माँ स्कंदमाता सिंह पर सवार हैं और अपनी गोद में बालक स्कंद (कार्तिकेय) को धारण किए हुए हैं, जिसके कारण इन्हें यह नाम मिला है।
श्री भाटिया ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। स्कंदमाता माता की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें पीले फूल, केले, पान, सुपारी और लौंग अर्पित करें। माँ स्कंदमाता की पूजा के लिए इस मंत्र का जाप करें: “या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ माँ स्कंदमाता को केले या अन्य पीले फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। स्कंदमाता की पूजा से बुद्धि का विकास होता है, संतान की प्राप्ति होती है और मोक्ष प्राप्त होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो संतान प्राप्ति की कामना करते हैं. इस दिन को ज्ञान और पराक्रम की देवी की आराधना के रूप में भी जाना जाता है। संतान प्राप्ति की कामना करने वाले लोगों के लिए स्कन्दमाता की पूजा अर्चना करने का अपना महत्व है. श्री भाटिया ने कहा कि सच्चे मन से माता रानी की पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है.

