5 वर्षों से दर्द और सामाजिक परेशानी झेल रही महिला की जीवन गुणवत्ता हुई बहाल
फरीदाबाद | फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल मेडिकल मामले में बिहार की 33 वर्षीय महिला का सफल उपचार कर उसकी सामान्य जिंदगी लौटाने में बड़ी सफलता हासिल की है। महिला पिछले पांच वर्षों से प्रसव के दौरान लगी गंभीर चोट के कारण असहनीय दर्द, मल असंयम और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं से जूझ रही थी।
डॉक्टरों के अनुसार, महिला को दूसरी डिलीवरी के दौरान पेरिनियम टियर नामक गंभीर चोट लगी थी। पेरिनियम शरीर का वह हिस्सा होता है जो योनि और गुदा मार्ग के बीच स्थित होता है। प्रसव के दौरान यह हिस्सा फट गया था और चोट इतनी गंभीर थी कि आसपास की मांसपेशियां, मलाशय तथा गुदा की परतें तक क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इस कारण महिला का मल त्याग और गैस पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया था। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार का गंभीर पेरिनियल टियर प्रसव के केवल 0.05 से 0.2 प्रतिशत मामलों में ही देखा जाता है।
शुरुआती उपचार के दौरान सर्जरी कर चोट को ठीक करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। समय बीतने के साथ महिला की स्थिति और खराब होती चली गई। अपने गृह राज्य में समुचित इलाज न मिलने के बाद महिला ने आखिरकार फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद का रुख किया।
अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि महिला करीब 6 से 7 सेंटीमीटर बड़े पुराने पेरिनियल टियर से पीड़ित थी, जिससे गुदा और आसपास की मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच चुका था। इसके बाद अस्पताल की मेडिकल टीम ने एडिशनल डायरेक्टर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता सोनी और कंसल्टेंट डॉ. इशा वधावन की देखरेख में जटिल सर्जिकल रिपेयर प्रक्रिया को अंजाम दिया।
करीब डेढ़ घंटे चली इस सर्जरी में गुदा की भीतरी परत, स्फिंक्टर मांसपेशियों तथा योनि और गुदा के आसपास के क्षतिग्रस्त ऊतकों का बारीकी से पुनर्निर्माण किया गया। पुरानी चोट के कारण यह प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन डॉक्टरों की सटीक तकनीक और विशेषज्ञता से ऑपरेशन सफल रहा। सर्जरी के दो दिन बाद महिला को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. अनीता सोनी ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में समय पर पहचान और सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी चोटों का समय पर इलाज न किया जाए तो महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं डॉ. इशा वधावन ने कहा कि पुराने मामलों में सर्जरी अधिक जटिल हो जाती है, लेकिन सही तकनीक और देखभाल से मरीज की जीवन गुणवत्ता को दोबारा बेहतर बनाया जा सकता है।
फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. अभिषेक शर्मा ने कहा कि किसी भी महिला को इस प्रकार की समस्या को छिपाकर नहीं रखना चाहिए। सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा मिलने से वर्षों पुरानी जटिल समस्याओं का भी सफल समाधान संभव है।
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