गणतंत्र दिवस: संस्कार, संस्कृति और कर्तव्य का उत्सव
भारत का गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह नागरिकों को संविधान, कर्तव्यों और राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनके उत्तरदायित्वों की याद दिलाने का दिन है। इसी भावना के साथ फरीदाबाद के सूरजकुंड रोड स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम परिसर में संचालित स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद-वेदांग संस्कृत महाविद्यालय में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन अत्यंत भव्य, अनुशासित और गरिमामय वातावरण में किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर देशभक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम में आचार्यगण, विद्यार्थी, श्रद्धालु और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान के साथ किया गया। जैसे ही तिरंगा लहराया, पूरा परिसर देशप्रेम की भावना से गूंज उठा। उपस्थित सभी लोगों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ राष्ट्रगान में सहभागिता की।
ध्वजारोहण के बाद वातावरण में गर्व, एकता और समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया, जिसने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया।
कर्तव्यों के निर्वहन से होता है राष्ट्र का निर्माण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने गणतंत्र दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें हमारे संविधान में निहित अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और छात्रों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना था कि राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल अधिकारों की मांग से नहीं, बल्कि कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक पालन से संभव है। जब प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व को समझेगा, तभी देश सशक्त और समृद्ध बन सकेगा।
भारतीय संस्कृति विश्व को दिशा देने में सक्षम
अपने उद्बोधन में स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने भारत की प्राचीन संस्कृति, वेद-वेदांत और योग परंपरा की महत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की ये सांस्कृतिक धरोहर केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज इन मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़े, तो भारत पुनः ज्ञान, संस्कार और शांति का केंद्र बन सकता है। उन्होंने देशभक्ति को केवल भावना नहीं, बल्कि जीवनशैली के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
समारोह में महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। छात्रों ने देशभक्ति गीतों और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ सराहा।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति के गौरवशाली इतिहास को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और समर्पण कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण रहा।
योग प्रदर्शन से दिया गया स्वस्थ राष्ट्र का संदेश
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण छात्रों द्वारा किया गया योग आसनों का प्रदर्शन रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न योग आसनों का अभ्यास प्रस्तुत कर शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।
योग प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ नागरिक ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। यह प्रस्तुति भारतीय परंपरा और आधुनिक जीवन के संतुलन का सुंदर उदाहरण बनी।
देशप्रेम और सेवा भावना का संचार
समारोह के दौरान पूरे वातावरण में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों बल्कि उपस्थित सभी लोगों को अपने कर्तव्यों और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया।
महाविद्यालय प्रशासन ने इस अवसर पर सभी अतिथियों, आचार्यगणों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अनुशासित संचालन ने समारोह को स्मरणीय बना दिया।
उपहार, प्रसाद और आशीर्वाद के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने सभी बच्चों को उपहार प्रदान किए तथा आगंतुकों को प्रसाद और आशीर्वाद दिया। समारोह का समापन सकारात्मक ऊर्जा, प्रेरणा और राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ हुआ।
निष्कर्ष
स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद-वेदांग संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने यह संदेश स्पष्ट किया कि जब संस्कृति, शिक्षा और कर्तव्य एक साथ चलते हैं, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह आयोजन विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक मजबूत करने वाला रहा।
संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)
