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फरीदाबाद | 2 फरवरी 2026

हरियाणा के प्रसिद्ध सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल सूरजकुंड में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला–2026 की व्यवस्थाओं का सोमवार को जिला प्रशासन द्वारा निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर आयुष सिन्हा, उपायुक्त, फरीदाबाद ने मेला परिसर का दौरा कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को पर्यटकों की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

यह मेला लोकल फॉर ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से आए शिल्पकार, कलाकार और पर्यटक बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा समय-समय पर निरीक्षण को आवश्यक माना जा रहा है, ताकि आयोजन सुचारु रूप से संचालित हो और किसी भी स्तर पर अव्यवस्था न हो।


मेला परिसर की व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त आयुष सिन्हा ने मेला परिसर के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया। उन्होंने शिल्पकारों द्वारा लगाए गए स्टॉल, प्रवेश और निकास मार्ग, चौपाल क्षेत्र, फूड कोर्ट, पार्किंग स्थल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का अवलोकन किया।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मेले में आने वाले प्रत्येक पर्यटक को सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण मिले। उपायुक्त ने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, इसलिए इसकी व्यवस्थाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए।


शिल्पकारों की कला और हस्तशिल्प की सराहना

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विभिन्न राज्यों और देशों से आए शिल्पकारों से संवाद किया और उनके द्वारा प्रदर्शित हस्तशिल्प एवं कलाकृतियों को देखा। उन्होंने शिल्पकारों की मेहनत, रचनात्मकता और पारंपरिक कौशल की सराहना करते हुए कहा कि सूरजकुंड मेला शिल्पकारों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है, जहां वे अपनी कला को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोकल फॉर ग्लोबल की अवधारणा इसी बात पर आधारित है कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिले।


लोकल फॉर ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत की सोच

उपायुक्त आयुष सिन्हा ने निरीक्षण के दौरान कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला आत्मनिर्भर भारत की सोच को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम है। यहां प्रदर्शित शिल्प और उत्पाद यह दर्शाते हैं कि भारत की पारंपरिक कला और कारीगरी आज भी वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकती है।

उन्होंने कहा कि जब स्थानीय शिल्पकारों को इस तरह के मंच मिलते हैं, तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित रहती है। यही उद्देश्य इस मेले के आयोजन के पीछे भी निहित है।


पर्यटकों की सुविधा पर विशेष ध्यान

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

उन्होंने विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए:

  • स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड और सूचना केंद्र

  • बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए सुगम आवागमन

  • पर्याप्त बैठने की व्यवस्था

  • पेयजल और शौचालयों की नियमित सफाई

उपायुक्त ने कहा कि एक सुव्यवस्थित मेला ही पर्यटकों को सकारात्मक अनुभव प्रदान कर सकता है।


सुरक्षा व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सूरजकुंड मेले में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के लिए एक अहम विषय है। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की।

उन्होंने अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की तैनाती को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग पूरी तरह सतर्क रहें और पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार कार्य करें।


फूड कोर्ट और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण

उपायुक्त ने मेला परिसर में स्थित फूड कोर्ट का भी निरीक्षण किया। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता और साफ-सफाई की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

स्वच्छता को लेकर उन्होंने कहा कि मेला परिसर की साफ-सफाई नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। कूड़ा निस्तारण, शौचालयों की सफाई और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।


यातायात और पार्किंग व्यवस्था

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने यातायात और पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र के आसपास यातायात सुचारु रहे, इसके लिए ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • पार्किंग स्थलों पर पर्याप्त संकेतक लगाए जाएं

  • यातायात पुलिस की तैनाती प्रभावी रहे

  • जाम की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था हो

इससे पर्यटकों को मेला परिसर तक पहुंचने और वापस लौटने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।


चिकित्सा और आपात सेवाएं

उपायुक्त ने चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि मेला परिसर में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस सेवाएं सक्रिय स्थिति में रहनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी सतर्क रहें और किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहें।


प्रशासन का उद्देश्य: सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त आयुष सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाना है। उन्होंने कहा कि यह मेला हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की सांस्कृतिक विरासत का आनंद ले सकें।


पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर

उपायुक्त ने कहा कि पर्यटकों का अनुभव ही किसी भी आयोजन की सफलता का पैमाना होता है। यदि पर्यटक संतुष्ट होकर लौटते हैं, तो यह आयोजन की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय रहे

  • पर्यटकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए

  • सूचना और सहायता केंद्रों पर प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद रहे


शिल्प मेला: सांस्कृतिक संवाद का मंच

39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला केवल खरीदारी या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां देश-विदेश के लोग एक-दूसरे की परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर पाते हैं।

उपायुक्त ने कहा कि ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं।


आने वाले दिनों के लिए निर्देश

निरीक्षण के समापन पर उपायुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से व्यवस्थाओं की समीक्षा करें और किसी भी प्रकार की कमी को तुरंत दूर करें। उन्होंने कहा कि मेले के शेष दिनों में भी प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जाएगी।


सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की पहल

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। प्रशासन का यह प्रयास है कि यह आयोजन हर वर्ष नए मानक स्थापित करे और वैश्विक स्तर पर भारतीय शिल्प और संस्कृति की पहचान को और मजबूत बनाए।

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