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टेलीग्राम टास्क के नाम पर साइबर ठगी का मामला

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराध के मामलों में भी तेजी से वृद्धि देखने को मिल रही है। खासकर “वर्क फ्रॉम होम”, “ऑनलाइन टास्क” और “आसान कमाई” जैसे लालच भरे संदेश लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ क्षेत्र से सामने आया है, जहां टेलीग्राम टास्क के बहाने एक व्यक्ति से 11,91,076 रुपये की साइबर ठगी की गई।

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खाताधारक और बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर अपराधों के प्रति सतर्कता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता को दर्शाती है।


फरीदाबाद में दर्ज हुआ मामला

यह मामला फरीदाबाद के आदर्श नगर, बल्लभगढ़ क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़ित व्यक्ति ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसे व्हाट्सएप के माध्यम से “वर्क फ्रॉम होम” से जुड़ा एक संदेश प्राप्त हुआ था।

शुरुआती बातचीत के बाद पीड़ित को टेलीग्राम ऐप पर जोड़ दिया गया, जहां उसे ऑनलाइन रेटिंग और टास्क पूरा करने का काम दिया गया। आरोप है कि शुरुआत में छोटे-मोटे कार्य दिखाकर विश्वास में लिया गया और बाद में विभिन्न टास्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाए गए।


कैसे दिया गया ठगी को अंजाम

पुलिस के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को यह भरोसा दिलाया कि टास्क पूरा करने पर उसे निश्चित मुनाफा मिलेगा। पहले चरण में कम राशि जमा कराई गई, जिससे पीड़ित को लगा कि काम वास्तविक है। इसके बाद लगातार बड़े टास्क दिए गए और अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया।

पीड़ित ने बताए गए खातों में कुल 11,91,076 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उसने अपनी राशि वापस मांगनी चाही या मुनाफे के बारे में पूछा, तो संपर्क बंद कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।


साइबर थाना बल्लभगढ़ की जांच

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना बल्लभगढ़ में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर, डिजिटल लेन-देन और खातों की जानकारी जुटाई गई।

जांच में सामने आया कि इस ठगी में कई लोगों की भूमिका थी, जिनमें खाताधारक से लेकर खाता आगे उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति शामिल थे। यह नेटवर्क इस तरह से काम कर रहा था कि पैसे एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते थे, जिससे असली ठग तक पहुंचना मुश्किल हो सके।


पांच आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस जांच में सामने आया कि शैलेन्द्र और राजेश इस मामले में खाताधारक थे। इन दोनों ने अपने बैंक खाते आगे अन्य लोगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराए। इसके बाद यह खाते क्रमशः अन्य आरोपियों तक पहुंचते गए।

जांच के अनुसार:

  • खाताधारक द्वारा खाता उपलब्ध कराया गया

  • खाते को आगे अन्य व्यक्ति को सौंपा गया

  • उस खाते में ठगी की राशि प्राप्त की गई

  • फिर राशि को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया

एक आरोपी के खाते में ठगी की रकम में से 1,98,000 रुपये आए थे, जिन्हें बाद में दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। इस प्रकार पूरे नेटवर्क के माध्यम से रकम इधर-उधर की जाती रही।

पुलिस ने सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।


डिजिटल ठगी का बढ़ता खतरा

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी किस तरह नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भेजे जाने वाले टास्क आधारित ऑफर अक्सर धोखाधड़ी का हिस्सा होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ठग लोगों की लालच, जल्दी पैसा कमाने की चाह और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। शुरुआत में छोटी राशि लौटाकर विश्वास बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम ऐंठ ली जाती है।


पुलिस की अपील और सतर्कता संदेश

फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, मैसेज या टेलीग्राम टास्क के झांसे में न आएं। “वर्क फ्रॉम होम” या “ऑनलाइन टास्क” के नाम पर अगर पहले पैसे जमा कराने को कहा जाए, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए।

पुलिस का कहना है कि:

  • अनजान नंबरों से आए मैसेज पर भरोसा न करें

  • किसी भी ऐप या व्यक्ति को बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें

  • संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें


साइबर अपराध पर सख्त रुख

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में केवल मुख्य ठग ही नहीं, बल्कि खाता उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि इस तरह के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

यह कार्रवाई एक संदेश भी है कि बैंक खाता किराए पर देना या किसी अन्य को उपयोग के लिए उपलब्ध कराना भी अपराध की श्रेणी में आता है।


निष्कर्ष

बल्लभगढ़ में सामने आया यह टेलीग्राम टास्क ठगी का मामला डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों की गंभीर चेतावनी है। पुलिस की तत्परता से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन आम नागरिकों की सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।

आसान कमाई के लालच में किए गए एक गलत फैसले से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग डिजिटल लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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