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फरीदाबाद | 28 जनवरी 2026

हरियाणा के फरीदाबाद में साइबर ठगी के मामलों में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच एक और मामला दर्ज किया गया है, जिसमें वर्क फ्रॉम होम के नाम पर टेलीग्राम टास्क देकर एक महिला से 1,14,794 रुपये की ठगी की गई। इस प्रकरण में साइबर थाना NIT की टीम ने कार्रवाई करते हुए ठगी में प्रयुक्त बैंक खाते के खाताधारक को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संबंधित पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

वर्क फ्रॉम होम के नाम पर बढ़ती साइबर ठगी

डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ ही साइबर अपराध के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। हाल के वर्षों में वर्क फ्रॉम होम के नाम पर लोगों को आसान कमाई का लालच देकर ठगने के कई मामले सामने आए हैं। खासतौर पर टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से टास्क देने और उसके बदले मोटे मुनाफे का दावा करना, साइबर अपराधियों का एक आम तरीका बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में ठग शुरुआत में छोटे-छोटे टास्क देकर भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं। जब पीड़ित व्यक्ति को लाभ की उम्मीद बंध जाती है, तो उसे अलग-अलग खातों में पैसे जमा कराने को कहा जाता है।

शिकायतकर्ता की आपबीती

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना NIT क्षेत्र निवासी एक महिला ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उसे वर्क फ्रॉम होम का प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें टेलीग्राम के जरिए कुछ ऑनलाइन टास्क पूरे करने के लिए कहा गया। शुरुआत में टास्क आसान थे और मुनाफे का भरोसा दिलाया गया, जिससे उसे यह काम विश्वसनीय लगा।

आरोप है कि टास्क के नाम पर अलग-अलग चरणों में उससे कुल 1,14,794 रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा करवा लिए गए। जब महिला ने वादा किए गए लाभ के साथ अपनी राशि वापस मांगी, तो संबंधित टेलीग्राम अकाउंट से उसे ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद महिला को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस की शरण ली।

मामला दर्ज कर शुरू हुई जांच

शिकायत के आधार पर साइबर थाना NIT में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन खातों में गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

जांच के दौरान सामने आया कि ठगी की राशि जिन खातों में भेजी गई थी, उनमें से एक खाता राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के भावड़ा निवासी अमित कुमार के नाम पर था। पुलिस ने इस जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की।

खाताधारक की भूमिका

पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई कि अमित कुमार संबंधित बैंक खाते का खाताधारक है। आरोप है कि उसने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था, जिसमें ठगी की रकम में से करीब 60,000 रुपये प्राप्त हुए थे। हालांकि, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि खाताधारक की भूमिका केवल खाता उपलब्ध कराने तक सीमित थी या वह इस पूरे गिरोह की गतिविधियों से अवगत था।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी के मामलों में खाताधारकों की भूमिका बेहद अहम होती है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपना बैंक खाता अवैध गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराता है, तो उसे भी कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

अदालत में पेशी और रिमांड

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जाएगी कि ठगी से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और रकम आगे कहां-कहां ट्रांसफर की गई।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के मामलों में कई बार खाताधारक केवल एक कड़ी होते हैं, जबकि पूरा नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में फैला होता है। इसलिए जांच का दायरा व्यापक रखा गया है।

साइबर अपराध से सतर्क रहने की जरूरत

यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले वर्क फ्रॉम होम या आसान कमाई के प्रस्तावों के प्रति लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि

  • अनजान नंबर या अकाउंट से मिले ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें

  • किसी भी टास्क या निवेश के लिए पैसे भेजने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें

  • बैंक विवरण, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें

साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव मानी जाती है।

पुलिस की अपील

फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार का संदिग्ध ऑनलाइन प्रस्ताव मिलता है, तो उसकी जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में दें। पुलिस का कहना है कि समय पर मिली सूचना से न केवल पीड़ित की मदद हो सकती है, बल्कि बड़े साइबर गिरोहों का भी पर्दाफाश किया जा सकता है।

पुलिस प्रशासन का यह भी कहना है कि कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष जांच की जा रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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