ब्रह्मोत्सव की ऊर्जा, जीवन में आध्यात्मिक आनंद का संचार करती है: पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज
फरीदाबाद/नई दिल्ली।सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम- श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे पांच दिवसीय 19वें ब्रह्मोत्सव समारोह में दूसरे दिन सोमवार कोश्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर अनंतविभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज केसान्निध्य में मुख्य पुजारी रमाकांतशास्त्री और दक्षिण भारत से आएश्रीरामानुज संप्रदाय के विद्वानों विधि विधान से मंत्रोच्चरण के साथचतुस्स्थानार्चनम् वंदना स्तुति और श्रीसुदर्शन यज्ञ किया। आश्रम के युवाचार्य स्वामी श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराजने लोक कल्याण के लिए श्रीगरूड़ भगवान के माध्यम से देवताओं को आह्वान किया। ब्रह्मोत्सवमें सेवा, सुमिरन और समर्पण का संगम दिखा। स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने अपने प्रवचन मेंकहा कि ब्रह्मोत्सव में विभिन्न वाद्ययंत्रो के करीब 36संगीतमयी राग सुरो से आह्वान किए गए देवतागणों की अपार कृपा से जीवात्मा मोक्षप्राप्त करती है। ब्रह्मोत्सव की ऊर्जा जीवन के विकारों को दूर करती है औरआध्यात्मिक आनंद का संचार करती है। जिस प्रकार कोई आत्मा प्रकृति और ईश्वर के बिनानहीं रह सकता वैसे ही ईश्वर भी प्रकृति और आत्मा के बिना संभव नहीं है। उन्होंनेकहा कि चतुस्स्थानार्चनम वंदना मानव जीवन,सिद्धांत, देवालय, और अनुष्ठान में निहित है। जीव और ब्रह्म एक हैं। इसलिए ब्रह्मोत्सव का महत्व बताया गया है कि इसके आयोजन सेपूरा क्षेत्र सुख स्मृदि्ध और लोकजीवन खुशहाल रहता है। ब्रह्मोत्सव श्रीसिद्धदाताआश्रम के श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए भी कल्याणकारी है।विश्व कल्याण के लिए सुदर्शन यज्ञब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन यज्ञशाला में विश्वकल्याण के लिएसुदर्शन यज्ञ किया। यज्ञ के माध्यम से अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्यस्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने लोककल्याण की वंदना-स्तुति की। आश्रम के युवाचार्य स्वामी श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराजने भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से उत्पन्न सुदर्शन यज्ञ में विश्व कल्याण के लिए आहूति दी गई। सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु कासबसे शक्तिशाली शस्त्र है। ———————–
दक्षिण के नादस्वरम्और बंचारी के ढोल की ताल पर भक्ति संगीत पर झूमे श्रद्धालु….मधुराधिपतेरखिलं मधुरं…, श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने… जैसे संगीत मयी भजनों पर अपने गुरु के सान्निध्य में श्रद्धालु झूमते रहे। भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण के प्रतिअपने आनंद को प्रस्तुत करते कलाकारों और श्रद्धालुओं ने जब नादस्वरम पर तान छेड़ीतो श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। साथ हीआश्रम में बंचारी के नगाड़ा कलाकारों की ब्रज शैली में आकर्षण का केंद्र बनी रही। ब्रह्मोत्सव के संत समागम में विभिन्न संतो ने स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने सभी श्रद्धालुओंभोजन प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया

