फरीदाबाद। बिना संस्कारों के जीवन पशु तुल्य है। संस्कारों के द्वारा ही व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को निखार सकता है और राष्ट्र को समृद्ध बनाने में अपनी सहभागिता निभा सकता है। यह बात ग्रेटर फरीदाबाद स्थित श्रद्धा मंदिर स्कूल में चल रहे चार दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ के तीसरे दिन मुख्य वक्ता एवं आर्य  विद्वान नरेंद्र अग्निहोत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता देशबंधु आर्य ने की। नरेंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि विश्व गुरु भारत में वर्तमान में युवा पीढ़ी संस्कारों के प्रति जागरूक नहीं है। संस्कारों का समावेश करना माता-पिता अध्यापक एवं समाज के प्रबुद्ध लोगों का कर्तव्य बन जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर भारत शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रभारी भाई जगराम सिंह ने कहा कि आज का विषय संस्कारों का रखा गया है इसलिए हमें अपनी युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता है। यही बात ऋषि और वेदों ने कही है। कार्यक्रम के संयोजक एवं श्रद्धा मंदिर स्कूल के प्रिंसिपल डॉक्टर गजराज सिंह आर्य ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रद्धा  मंदिर विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों से भी जुड़ा है, क्योंकि बिना संस्कार के शिक्षा अधूरी है ।इस अवसर पर योगी तेजपाल सिंह, मूलचंद आर्य, राजकुमार आर्य, विमला ग्रोवर, होतीलाल आर्य, एसपी अरोड़ा, महेश आर्य, मदनलाल तनेजा, नरेश अग्रवाल, राजन सिक्का, करमचंद शास्त्री, जितेंद्र सरल ने भी शिरकत की। इससे पूर्व छात्र -छात्राओं एवं शहर के गणमान्य लोगों ने यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में अपनी आहुतियां देकर सर्व मंगल की कामना की।

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