फरीदाबाद। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम (श्री सिद्धदाता आश्रम) में आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का पांच दिवसीय महासंगम गुरुवार को संपन्न हो गया। 19वें श्री ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन आश्रम का परिसर भक्ति के चरम पर था, जहाँ हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की भव्य रथयात्रा निकाली गई। श्रीरामानुज संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार आयोजित इस महोत्सव ने न केवल फरीदाबाद बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की विशाल रथयात्रा रही। पीठाधीश्वर स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सानिध्य में निकली इस शोभायात्रा में भगवान के विग्रह को भव्य रथ पर विराजमान किया गया। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘जय श्रीमन नारायण’ के उद्घोष के बीच श्रद्धालु झूमते-गाते चले। इस दौरान महिला श्रद्धालुओं द्वारा निकाली गई कलश यात्रा ने मार्ग की शोभा में चार चाँद लगा दिए।

इस पावन अवसर पर हरियाणा सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री श्री राजेश नागर जी, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया श्री आत्माराम नड़करनी जी ने रथयात्रा में सम्मिलित होकर भगवान का आशीर्वाद लिया। रात्रि के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री हरियाणा के मीडिया सलाहकार श्री राजीव जेटली जी, पूर्व शिक्षा मंत्री श्रीमती सीमा त्रिखा जी और फरीदाबाद की मेयर श्रीमती प्रवीण जोशी जी जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

संत समागम के अंतर्गत वृंदावन से स्वामी श्री रामेश्वराचार्य जी महाराज, बिहार से स्वामी ज्योतिनारायणाचार्य जी महाराज और आचार्य नरेश नारायण जी जैसी महान विभूतियों ने अपनी उपस्थिति से इस उत्सव की गरिमा बढ़ाई।

उत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जयपुर के सुप्रसिद्ध भजन गायक लोकेश शर्मा ने अपनी मधुर आवाज में ऐसे भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए कि देश-विदेश से आए श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए। इससे पूर्व, दिल्ली के मधुबन आर्ट के कलाकारों ने अपनी मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान की लीलाओं का सजीव चित्रण किया, जिसे देख भक्त भावविभोर हो उठे।

पांच दिनों तक चले इस उत्सव में श्री सुदर्शन नृसिंह महायज्ञ की महा पूर्णाहुति दी गई, जिसमें विश्व शांति और जन कल्याण की प्रार्थना की गई। प्रतिदिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुमधुर भजनों और संगीत ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। आश्रम के चप्पे-चप्पे को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात् वैकुंठ धरती पर उतर आया हो।

समापन अवसर पर पूज्य गुरुदेव स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने सभी सेवादारों, सञ्चालन समिति और भक्तों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह उत्सव भक्तों के विश्वास और सेवादारों के निस्वार्थ परिश्रम का परिणाम है। सेवा ही नारायण की सच्ची पूजा है।”

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