– विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जनप्रतिनिधियों को किया सम्मानित
– ग्रामीण युवाओं को कौशल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
– साधन से वंचित कोई भी विद्यार्थी नहीं होगा कौशल शिक्षा से वंचित: कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार  


फरीदाबाद, 24 अप्रैल। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर “सरपंच और प्राचार्य बैठक” के दौरान ग्राम पंचायत छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत सामुदायिक कौशल विकास महाविद्यालय (सीसीएसडी) के प्राचार्य प्रो. संजीव गोयल के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों एवं विद्यालयों से आए प्रधानाचार्यों का स्वागत करते हुए सीसीएसडी द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कौशल आधारित शिक्षा, उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार किए गए पाठ्यक्रम, पढ़ाई के साथ कमाई, इंटर्नशिप, पूर्व अर्जित कौशल की मान्यता (आरपीएल), प्रमाणन पाठ्यक्रम तथा रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा इन पाठ्यक्रमों से लाभान्वित होकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे ग्रामीण युवाओं को इन अवसरों के प्रति जागरूक करें और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने हेतु प्रेरित करें।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायत छात्रवृत्ति योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं को शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का सशक्त अवसर है। उन्होंने कहा कि सीसीएसडी के अंतर्गत संचालित पूर्व अर्जित कौशल की मान्यता (आरपीएल) कार्यक्रम तथा उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों को उद्योग जगत में व्यापक सराहना मिल रही है। अनेक उद्योग स्वयं विश्वविद्यालय से संपर्क कर ऐसे पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की इच्छा जता रहे हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को कौशल प्रमाणन प्रदान कर बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

कुलगुरु प्रो कुमार ने यह भी आश्वासन दिया कि इस छात्रवृत्ति योजना के अतिरिक्त विश्वविद्यालय हरसंभव प्रयास करेगा कि यदि किसी ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव आता है और कोई विद्यार्थी कौशल शिक्षा प्राप्त करना चाहता है, तो साधन के आभाव में उसे अवसरों से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।

इस अवसर पर शुरू की गई ग्राम पंचायत छात्रवृत्ति योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के उन विद्यार्थियों के लिए है, जो सीसीएसडी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं। योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच की अनुशंसा, हरियाणा सरकार द्वारा जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, परिवार पहचान पत्र (पीपीपी), तथा परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होना आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त सीसीएसडी द्वारा संचालित प्रत्येक बी.वोक., पीजी डिप्लोमा तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रम में 5-5 सीटें इस योजना के अंतर्गत निर्धारित की गई हैं। यह योजना ग्रामीण प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर सूरजपाल बूरा, चेयरमैन, सरपंच एसोसिएशन फरीदाबाद, तथा एडवोकेट संजय कुमार, चेयरमैन सरपंच एसोसिएशन एवं सरपंच, गांव सेहराला, पृथला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा पंचायती प्रतिनिधियों को कौशल शिक्षा अभियान में सहभागी बनाना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन को इस अभिनव पहल के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम में श्री अमित, डीएसपी नीमका जेल तथा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, एवं श्रीमती अंशु सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद भी उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने विश्वविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति योजना और कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा योग प्रदर्शन तथा हरियाणवी लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिन्हें उपस्थित अतिथियों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के अंत में पंचायत प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय की ओर से शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात प्रो. मुनीष वशिष्ठ ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय उप-प्राचार्या डॉ. सपना तनेजा तथा सीसीएसडी के संकाय सदस्यों द्वारा किया गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना ग्रामीण युवाओं को कौशल शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
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