साधु संतों ने समाजसेवी रूप सिंह नागर को हिंदू रत्न से किया विभूषित
फरीदाबाद। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास द्वारा दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित भव्य अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में देशभर से हजारों साधु-संतों, धर्माचार्यों एवं सनातन धर्मावलंबियों ने भाग लिया। धर्म संसद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने, देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा सनातन बोर्ड के गठन जैसी महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्र और धर्म से जुड़े विभिन्न विषयों पर संत समाज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संगठित प्रयासों का आह्वान किया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक रूप सिंह नागर को सनातन धर्म और समाज के प्रति उनके समर्पण एवं योगदान के लिए संत समाज द्वारा “हिंदू रत्न” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर रूप सिंह नागर ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र और हमारे आराध्य देव हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को उसके वास्तविक स्वरूप में मुक्त कराने की दिशा में केंद्र सरकार को अविलंब कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि जन्मस्थान पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुरूप पूजा-अर्चना कर सकें।
नागर ने कहा कि सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी प्रश्न है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष एवं अदालत में मुख्य पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि समाज को अपने आराध्य के जन्मस्थान को मुक्त करवाने के लिए एकजुट होना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण हमारे सनातन की आत्मा हैं। अब समय आ गया है जब हम सभी उनके माखन मिश्री के भोग के लिए आरपार की लड़ाई लड़ें।
धर्म संसद को संबोधित करते हुए जगद्गुरु स्वामी विजयराम देवाचार्य भैया जी महाराज, जगद्गुरु चक्रपाणि महाराज, जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरी जी महाराज, शनिधाम पीठाधीश्वर स्वामी निजस्वरूपानंद दाती महाराज, डॉ. लोकेश मुनि महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि देश की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए समाज को जागरूक और संगठित रहने की आवश्यकता है। संतों ने अपने संबोधनों में गौ संरक्षण को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताते हुए देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग दोहराई। साथ ही सनातन धर्म से जुड़े धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों के संरक्षण एवं समन्वय के लिए एक स्वतंत्र सनातन बोर्ड के गठन की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों और श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर एकजुटता का परिचय दिया।
संत समाज ने समाज के सभी वर्गों से सनातन संस्कृति के संरक्षण और धार्मिक जागरण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। धर्म संसद का समापन वैदिक मंत्रोच्चार और राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़े हनुमान मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी सूरजगिरी महाराज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनिया ठाकुर, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री महिपाल बिड़लान, राष्ट्रीय मंत्री राजन कुमार, आचार्य राजेश शास्त्री, डॉ स्वामी सच्चिदानंद, राजमाता अंबिका, महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण महाराज, सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता डॉ ए पी सिंह, अराधना सोलंकी, राजकुमार, पीसी गुप्ता, प्रवीण शर्मा आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

