बाल विवाह में शामिल माता-पिता ही नहीं, रिश्तेदार व बिचौलिये भी होंगे दंडित: डीसी
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत व्यापक जागरूकता अभियान
फरीदाबाद, 19 जनवरी |
भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अभियान के तहत साहुपुरा गांव आर्य नगर, बुखारपुर, भूदत्त कॉलोनी, नवलू कॉलोनी, भीकम कॉलोनी बल्लभगढ़, गांव सारण और साहुपुरा गांव में मंदिरों व मस्जिदों में धार्मिक नेताओं के सहयोग से आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी गई।
मंदिरों, मस्जिदों और बाजारों तक पहुंचा संदेश
जागरूकता अभियान केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रहा।
टेंट हाउस, मिठाई की दुकानों और फर्नीचर की दुकानों पर भी विशेष रूप से संपर्क कर बाल विवाह विरोधी संदेश दिया गया।
कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित नागरिकों को यह शपथ दिलाई गई कि वे न तो बाल विवाह करेंगे और न ही किसी भी परिस्थिति में बाल विवाह होने देंगे।
बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत सख्त सजा का प्रावधान
संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने बताया कि
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह में शामिल रिश्तेदार, बिचौलिये और अन्य सहयोगी भी कानून के दायरे में आते हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
सूचना मिलने पर तुरंत करें शिकायत
हेमा कौशिक ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो उसे नजरअंदाज न करें।
उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या चौकी में दी जा सकती है।
इसके अलावा, 24 घंटे सक्रिय पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बाल विवाह की रोकथाम को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस संबंध में प्राप्त प्रत्येक सूचना पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का लक्ष्य है कि बच्चों का सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
