प्री-पेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर साइबर ठगी का मामला
डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। खासतौर पर “पार्ट-टाइम जॉब”, “ऑनलाइन रेटिंग” और “आसान कमाई” जैसे ऑफर लोगों को ठगी के जाल में फंसा रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला फरीदाबाद से सामने आया है, जहां प्री-पेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर एक व्यक्ति से 9,34,000 रुपये की ठगी कर ली गई।
इस मामले में फरीदाबाद पुलिस की साइबर थाना सेंट्रल टीम ने कार्रवाई करते हुए खाता उपलब्ध करवाने वाले एक आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
फरीदाबाद से दर्ज हुई शिकायत
यह मामला फरीदाबाद के सेक्टर-77 क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पीड़ित व्यक्ति ने साइबर थाना सेंट्रल में दी गई शिकायत में बताया कि उसके व्हाट्सएप पर एक अंजान नंबर से लिंक प्राप्त हुआ था। संदेश में पार्ट-टाइम काम के नाम पर गूगल मैप्स पर रेटिंग और कमेंट करने का ऑफर दिया गया था।
लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ गया, जहां उसे प्री-पेड टास्क दिए जाने लगे। शुरुआत में काम को आसान और भरोसेमंद दिखाया गया, जिससे पीड़ित को विश्वास हो गया कि यह एक वैध ऑनलाइन कार्य है।
कैसे दिया गया ठगी को अंजाम
पुलिस के अनुसार, टेलीग्राम ग्रुप में जुड़े व्यक्ति को अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से पैसे निवेश करने के लिए कहा गया। हर टास्क के बदले अधिक रिटर्न का झांसा दिया गया। पीड़ित ने टेलीग्राम प्री-पेड टास्क के नाम पर विभिन्न खातों में कुल 9,34,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ समय बाद जब पीड़ित ने अपना पैसा वापस मांगा या मुनाफे की बात की, तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। धीरे-धीरे ग्रुप से संपर्क टूट गया और तब जाकर उसे साइबर ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर थाना सेंट्रल की जांच
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना सेंट्रल में संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल, मोबाइल नंबर और डिजिटल लिंक का विश्लेषण किया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ठगी के इस पूरे नेटवर्क में कई लोग शामिल थे, जिनमें मुख्य ठगों के साथ-साथ बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति भी शामिल थे। इसी कड़ी में पुलिस पहले ही खाताधारक राजीव और जतिन को गिरफ्तार कर चुकी थी।
राजस्थान से आरोपी की गिरफ्तारी
मामले की आगे की जांच में साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने राजस्थान के जोधपुर से पवन नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी की उम्र 23 वर्ष बताई गई है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पवन ने जतिन से बैंक खाता लेकर उसे आगे साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इस खाते का उपयोग ठगी की राशि के लेन-देन में किया गया।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, आरोपी पवन 12वीं पास है और मजदूरी का काम करता है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी ने लालच या दबाव में आकर अपना खाता आगे दिया था, लेकिन कानून की नजर में यह भी साइबर अपराध में सहभागिता मानी जाती है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि बैंक खाता किराए पर देना या किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
तीन दिन के पुलिस रिमांड पर आरोपी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी पवन को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि:
आरोपी का संपर्क किन-किन ठगों से था
इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं
ठगी की कुल राशि कितनी हो सकती है
जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।
पुलिस की अपील: रहें सतर्क
फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अंजान लिंक, टेलीग्राम ग्रुप या “आसान कमाई” के ऑफर से सावधान रहें। यदि:
पहले पैसे निवेश करने को कहा जाए
ज्यादा रिटर्न का लालच दिया जाए
संपर्क केवल टेलीग्राम या व्हाट्सएप तक सीमित हो
तो ऐसे ऑफर को तुरंत संदिग्ध मानें और उससे दूरी बनाए रखें।
साइबर ठगी से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। तकनीकी जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाना को देना नागरिकों की जिम्मेदारी भी है।
निष्कर्ष
प्री-पेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर 9.34 लाख रुपये की ठगी का यह मामला साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है। साइबर थाना सेंट्रल की सक्रियता से आरोपी की गिरफ्तारी संभव हो सकी है, लेकिन आम लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
डिजिटल दुनिया में लालच से दूर रहकर और सोच-समझकर ही किसी भी ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करना चाहिए।

