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संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच फरीदाबाद पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में साइबर थाना एनआईटी की टीम ने टेलीग्राम टास्क के माध्यम से मोटा लाभ कमाने का लालच देकर की गई ठगी के एक मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस मामले में ठगों ने एक व्यक्ति से 3 लाख 22 हजार रुपये की ठगी की थी।

टेलीग्राम टास्क के नाम पर ठगी का मामला

पुलिस के अनुसार, यह मामला फरीदाबाद के एनआईटी क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक स्थानीय निवासी ने साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 नवंबर 2025 को उसके व्हाट्सएप नंबर पर एक अनजान लिंक प्राप्त हुआ। लिंक पर क्लिक करने के बाद वह एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ गया।

ग्रुप में मौजूद लोगों द्वारा उसे यह भरोसा दिलाया गया कि यदि वह बताए गए टास्क पूरे करता है, तो उसे कम समय में अच्छा मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में छोटे-छोटे टास्क देकर भरोसा जीतने की कोशिश की गई, जिसके बाद पीड़ित को बड़े टास्क देकर अधिक पैसे निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।

अलग-अलग खातों में करवाई गई रकम ट्रांसफर

जैसे-जैसे पीड़ित का भरोसा बढ़ता गया, ठगों ने उसे विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। टास्क पूरा करने और मुनाफा मिलने के नाम पर पीड़ित से कुल 3,22,000 रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए गए।

जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि और मुनाफे की मांग की, तो आरोपियों ने बहाने बनाना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद उन्होंने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़ित ने साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना एनआईटी की टीम ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की।

जांच में सामने आया कि इस ठगी से जुड़े दो आरोपी राजस्थान के बीकानेर जिले के रहने वाले हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओम प्रकाश निवासी भिनसर, जिला बीकानेर और देवेन्द्र निवासी रामदेव नगर, बीकानेर के रूप में हुई है।

पूछताछ में सामने आए अहम खुलासे

पुलिस पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ओम प्रकाश ने अपनी बहन के नाम से एक बैंक खाता खुलवाया था। इस खाते का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया। बाद में यह खाता अपने साथी देवेन्द्र को उपलब्ध कराया गया, ताकि पैसों का लेन-देन किया जा सके।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उक्त खाते में ठगी की गई कुल राशि में से 45,000 रुपये ट्रांसफर हुए थे। बैंक खातों की जांच और लेन-देन के विवरण से आरोपियों की भूमिका की पुष्टि हुई।

आरोपियों को अदालत में किया गया पेश

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उन्हें माननीय अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश पर दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य संभावित खातों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस ठगी के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है।

साइबर ठगी के बढ़ते मामले

पिछले कुछ वर्षों में टेलीग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ठगी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। साइबर अपराधी आम लोगों को आसान कमाई, निवेश पर ज्यादा रिटर्न या ऑनलाइन टास्क के नाम पर जाल में फंसाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ठगी में अपराधी पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे उससे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। अधिकतर मामलों में पीड़ित तब तक सच्चाई नहीं समझ पाता, जब तक उसकी बड़ी रकम जा चुकी होती है।

फरीदाबाद पुलिस की आमजन से अपील

फरीदाबाद पुलिस ने इस मामले के बाद एक बार फिर आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया, टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर मिलने वाले किसी भी लालच भरे संदेश, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि:

  • अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें

  • आसान कमाई या मोटे मुनाफे के दावों से सतर्क रहें

  • किसी भी टेलीग्राम टास्क या ऑनलाइन जॉब से पहले उसकी सत्यता जांचें

  • संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें

साइबर अपराध से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। यदि कोई व्यक्ति समय रहते सतर्कता बरतता है और लालच में नहीं आता, तो अधिकांश साइबर ठगी के मामलों से बचा जा सकता है।

इसके साथ ही, यदि किसी के साथ इस तरह की ठगी हो जाती है, तो उसे बिना देरी किए संबंधित साइबर थाने या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

निष्कर्ष

टेलीग्राम टास्क के जरिए ठगी का यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले आसान कमाई के प्रस्तावों से सावधान रहना बेहद जरूरी है। फरीदाबाद पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि साइबर अपराधियों के तरीकों को समझें और सतर्क रहें। जागरूकता और सावधानी ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

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