संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)
फरीदाबाद में सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श उस समय देखने को मिला, जब अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की हरियाणा इकाई के अंतर्गत फरीदाबाद जिला इकाई द्वारा एक भव्य वैश्य अग्रवाल सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन सेक्टर-11 स्थित अग्रवाल सेवा सदन में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने सक्रिय भागीदारी की।
सम्मेलन के दौरान सामाजिक कुरीतियों, शिक्षा में ऐतिहासिक योगदान के समावेश और राजनीतिक सहभागिता जैसे विषयों पर कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। प्रमुख रूप से रात्रि विवाह और प्री-वेडिंग शूट जैसी आधुनिक सामाजिक प्रथाओं पर रोक लगाने तथा स्कूली पाठ्यक्रम में महाराजा अग्रसेन के इतिहास को शामिल करने की मांग सामने आई।
सामाजिक सुधार और वैचारिक विमर्श का मंच
इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल एक संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे समाज के भीतर आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने वाले मंच के रूप में देखा गया। वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ समाज में कई ऐसी परंपराएं विकसित हो गई हैं, जो आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ाती हैं। ऐसे में सामूहिक रूप से विचार कर संतुलित समाधान निकालना आवश्यक है।
सम्मेलन में मौजूद वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सामाजिक सुधार तभी संभव है, जब समाज स्वयं पहल करे और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा दी जाए।
समाज सुधार से जुड़े तीन प्रमुख प्रस्ताव
सम्मेलन के दौरान गोपाल शरण गर्ग, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन ने समाज के समक्ष तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे, जिन्हें उपस्थित जनसमूह का व्यापक समर्थन मिला।
1. अग्रवाल समाज की अलग जनगणना
पहला प्रस्ताव आगामी राष्ट्रीय जनगणना में अग्रवाल समाज की गणना अलग से किए जाने से संबंधित था। वक्ताओं का कहना था कि अलग जनगणना से समाज की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक योगदान और आवश्यकताओं का स्पष्ट आकलन हो सकेगा, जिससे नीति निर्माण में भी मदद मिल सकती है।
2. सामाजिक कुरीतियों पर रोक
दूसरा प्रस्ताव सामाजिक फिजूलखर्ची और दिखावे से जुड़ा रहा। इसमें रात्रि विवाह और प्री-वेडिंग शूट जैसी परंपराओं पर रोक लगाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि इन गतिविधियों से अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ता है और समाज के कमजोर वर्गों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. शिक्षा में महाराजा अग्रसेन का इतिहास
तीसरे प्रस्ताव में स्कूली पाठ्यक्रम, विशेषकर एनसीईआरटी में महाराजा अग्रसेन के जीवन, विचारों और योगदान को शामिल करने की मांग की गई। वक्ताओं का मानना था कि इससे नई पीढ़ी को समाजवाद, व्यापारिक नैतिकता और सामाजिक समरसता के ऐतिहासिक मूल्यों से परिचित कराया जा सकेगा।
अग्रोहा को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जोड़ने की अपील
राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग ने इस अवसर पर अग्रोहा शक्ति पीठ में चल रहे निर्माण कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अग्रोहा को अग्रवाल समाज की पितृ भूमि के रूप में देखा जाता है और समाज के लोगों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को वहां ले जाकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ें। उन्होंने इसे संस्कारों और पहचान से जुड़ा विषय बताया।
कैबिनेट मंत्री का आश्वासन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विपुल गोयल, हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री, ने सम्मेलन में पारित प्रस्तावों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा जो भी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए हैं, उन्हें सरकार के स्तर पर रखने और यथासंभव पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक संगठनों की भूमिका नीतिगत सुझाव देने में महत्वपूर्ण होती है और सरकार ऐसे सुझावों पर गंभीरता से विचार करती है।
समाज का गौरवशाली इतिहास
पूर्व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने अपने संबोधन में अग्रवाल समाज के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के आर्थिक और सामाजिक विकास तक, अग्रवाल समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने नई पीढ़ी से आग्रह किया कि वे इस विरासत को समझें और समाज सेवा के कार्यों में आगे आएं।
वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया गया, जिससे उनके सामाजिक योगदान और अनुभव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस सम्मान समारोह को उपस्थित लोगों ने भावनात्मक और प्रेरणादायक बताया।
राजनीतिक सहभागिता पर विचार
जिला महिला अध्यक्ष नेहा गर्ग ने अपने संबोधन में राजनीतिक सहभागिता के विषय को उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज की राजनीतिक भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है और इसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों दोनों से राजनीति और सामाजिक नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें राष्ट्रीय पदाधिकारी और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। स्वागत भाषण दिया गया और मंच संचालन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया गया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और समयबद्धता बनी रही, जिससे आयोजन की गंभीरता और गरिमा बनी रही।
समाजसेवियों की व्यापक भागीदारी
सम्मेलन में फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजसेवी, संगठन पदाधिकारी और स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया और यह स्पष्ट किया कि समाज के भीतर इन मुद्दों को लेकर गहरी रुचि और सहभागिता है।
निष्कर्ष
फरीदाबाद में आयोजित यह वैश्य अग्रवाल सम्मेलन सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक चेतना और संगठनात्मक एकजुटता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रहा। रात्रि विवाह और प्री-वेडिंग शूट पर रोक, महाराजा अग्रसेन के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा अलग जनगणना जैसे प्रस्तावों ने यह दर्शाया कि समाज भविष्य को लेकर गंभीर और सजग है। यह सम्मेलन केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मंच बनकर उभरा।

