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संवाददाता – Divyanshu Ojha (Journalist)

विदेशी धरती से साइबर अपराधी काबू, फरीदाबाद पुलिस की तकनीकी कार्रवाई

शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर की गई बड़ी साइबर ठगी के एक मामले में फरीदाबाद पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहा आरोपी, जो भारत से बाहर छिपकर साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था, उसे आखिरकार तकनीकी साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल अपराधों में शामिल लोग चाहे कितनी भी तकनीकी सावधानियां क्यों न अपनाएं, जांच एजेंसियों की पकड़ से पूरी तरह बच पाना आसान नहीं है।


49.50 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा मामला

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत वर्ष 2024 में दर्ज एक शिकायत से हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सेक्टर-21D, फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने 5 जुलाई 2024 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके साथ शेयर मार्केट में निवेश कराने के नाम पर 49 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई है। शिकायतकर्ता को ऑनलाइन माध्यम से निवेश का झांसा दिया गया और विभिन्न चरणों में बड़ी धनराशि ट्रांसफर करवा ली गई।

शिकायत के आधार पर थाना साइबर एनआईटी, फरीदाबाद में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट से जुड़ी धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।


जमानत के बाद फरार हुआ आरोपी

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की पहचान वीरेंद्र, निवासी रोहतक के रूप में की। प्रारंभिक कार्रवाई में आरोपी को हिरासत में लिया गया था, लेकिन जमानत के लिए उसने शिकायतकर्ता से समझौते का दावा करते हुए एक फर्जी डिमांड ड्राफ्ट प्रस्तुत किया। इसी आधार पर उसे जमानत मिल गई, जिसके बाद वह फरार हो गया।

जब आरोपी अदालत में दोबारा पेश नहीं हुआ, तो उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। इसके बाद मामला केवल एक सामान्य साइबर ठगी का न रहकर फरार आरोपी की अंतरराष्ट्रीय तलाश में बदल गया।


तकनीक के सहारे छिपने की कोशिश

जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को ट्रेस होने से बचाने के लिए लगातार तकनीकी उपाय अपना रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी:

  • वर्चुअल SIM का इस्तेमाल कर रहा था

  • नियमित मोबाइल नेटवर्क के बजाय VPN (Virtual Private Network) के जरिए इंटरनेट का उपयोग करता था

  • अपनी डिजिटल लोकेशन छिपाने के लिए अलग-अलग सर्वर और एप्लिकेशन का सहारा लेता था

इन तरीकों का उद्देश्य यह था कि उसकी वास्तविक लोकेशन और पहचान पुलिस तक न पहुंच सके।


नेपाल में छिपे होने की मिली जानकारी

तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल ट्रेल और अन्य सबूतों के आधार पर साइबर थाना एनआईटी की टीम को यह संकेत मिले कि आरोपी भारत में नहीं बल्कि नेपाल के बुटवल क्षेत्र में छिपा हुआ है।

इसके बाद साइबर थाना एनआईटी और साइबर थाना सेंट्रल की टीमों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। दोनों टीमों ने मिलकर आरोपी की गतिविधियों, डिजिटल लॉग्स और संभावित ठिकानों का विश्लेषण किया।


संयुक्त टीम ने जुटाए अहम सबूत

थाना साइबर एनआईटी प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र सिंह और उप-निरीक्षक चेतन द्वारा तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर थाना साइबर सेंट्रल प्रभारी निरीक्षक विमल, सहायक उप-निरीक्षक सत्येंद्र और मुख्य सिपाही मनोज की एक विशेष टीम गठित की गई।

यह टीम नेपाल रवाना हुई और वहां कई दिनों तक स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी और भौतिक स्तर पर जांच की।


नेपाल में आरोपी को किया गया काबू

पुलिस टीम ने नेपाल में स्मार्ट तकनीकी निगरानी और सतर्कता के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी वीरेंद्र को पहचान कर काबू कर लिया। इसके बाद भारत सरकार की प्रक्रिया के तहत भारतीय दूतावास, काठमांडू से समन्वय स्थापित किया गया, ताकि आरोपी को भारत लाने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।

सभी आवश्यक दस्तावेजी और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद 28 जनवरी 2026 को आरोपी को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लाया गया।


भारत लाकर की गई औपचारिक गिरफ्तारी

भारत पहुंचने के बाद आरोपी को साइबर थाना एनआईटी की टीम ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक आदेश के अनुसार आरोपी को नीमका जेल, फरीदाबाद भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार अब आगे की जांच में आरोपी से जुड़े अन्य खातों, डिजिटल माध्यमों और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है।


साइबर अपराध जांच में तकनीक की भूमिका

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक साइबर अपराध केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय हो सकती है। वर्चुअल SIM, VPN और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर अपराधी खुद को सुरक्षित समझते हैं, लेकिन डिजिटल फॉरेंसिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ऐसे मामलों में भी कार्रवाई संभव है।


आम नागरिकों के लिए सतर्कता जरूरी

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश, ट्रेडिंग या किसी भी ऑनलाइन स्कीम में पैसा लगाने से पहले:

  • स्रोत की सत्यता जांचें

  • अनजान लिंक, ग्रुप या कॉल से सावधान रहें

  • किसी भी दबाव में आकर तुरंत धनराशि ट्रांसफर न करें

  • संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें

समय पर दी गई सूचना कई मामलों में बड़े नुकसान से बचा सकती है।


निष्कर्ष

विदेशी धरती पर छिपे आरोपी की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि साइबर अपराध चाहे कितनी भी जटिल तकनीक के जरिए किए जाएं, वे पूरी तरह कानून की पहुंच से बाहर नहीं रहते। डिजिटल सबूत, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और सतत जांच के माध्यम से ऐसे मामलों में कार्रवाई संभव है। यह मामला न केवल जांच एजेंसियों के लिए एक सीख है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सतर्क रहने का संदेश देता है।

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