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फरीदाबाद में ऑनलाइन ठगी के मामलों पर नियंत्रण के लिए पुलिस लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रीपेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर 2,27,000 रुपये की साइबर ठगी के एक मामले में साइबर थाना सेंट्रल, फरीदाबाद की टीम ने खाताधारक सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि किस तरह आसान कमाई के लालच में लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ठगी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से की गई, जिसमें पीड़िता को धीरे-धीरे विश्वास में लेकर बड़ी राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।


क्या है पूरा मामला: कैसे शुरू हुई ठगी

पुलिस प्रवक्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सेक्टर-85 फरीदाबाद निवासी एक महिला ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महिला ने बताया कि जनवरी 2025 के दौरान उसके व्हाट्सएप नंबर पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया था।

इस संदेश में—

  • घर बैठे पैसे कमाने

  • आसान टास्क पूरा करने

  • कम समय में मुनाफा

जैसे आकर्षक दावे किए गए थे। शुरुआत में यह विज्ञापन बेहद सामान्य और भरोसेमंद प्रतीत हुआ, जिससे शिकायतकर्ता को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।


प्रीपेड टास्क का झांसा, फिर निवेश का दबाव

व्हाट्सएप संदेश के बाद महिला को बताया गया कि कुछ ऑनलाइन टास्क पूरे करने पर उसे भुगतान मिलेगा। धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी और उसे प्रीपेड टेलीग्राम टास्क के बारे में बताया गया।

ठगों ने यह दावा किया कि—

  • पहले निवेश करने पर अधिक रिटर्न मिलेगा

  • यह एक सुरक्षित और प्रमाणित ऑनलाइन कार्य है

  • कई लोग पहले ही इससे पैसा कमा चुके हैं

इन बातों पर विश्वास कर शिकायतकर्ता ने अलग-अलग चरणों में कुल 2,27,000 रुपये निवेश कर दिए। लेकिन इसके बाद—

  • न तो कोई रिटर्न मिला

  • न ही जमा की गई राशि वापस की गई

  • संपर्क करने पर जवाब मिलना बंद हो गया

जब महिला को यह समझ में आया कि उसके साथ ठगी हो चुकी है, तो उसने तुरंत साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई।


शिकायत दर्ज होते ही शुरू हुई साइबर जांच

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना सेंट्रल में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें—

  • बैंक ट्रांजेक्शन की जांच

  • संदिग्ध खातों की पहचान

  • डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण

  • मोबाइल नंबर और ऑनलाइन गतिविधियों की पड़ताल

की गई।

जांच के दौरान पुलिस को यह पता चला कि ठगी की राशि कुछ बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजी गई थी। इसी आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।


राजस्थान के सीकर से दो आरोपी गिरफ्तार

तकनीकी साक्ष्यों और बैंक विवरणों के आधार पर साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने राजस्थान के सीकर जिले में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—

  • अशोक कुमार (उम्र 47 वर्ष)

  • अरुण (उम्र 21 वर्ष)

के रूप में हुई है। दोनों आरोपी सीकर जिले के निवासी बताए गए हैं।


खाताधारक से ठगों तक कैसे पहुंचा पैसा

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि—

  • आरोपी अशोक कुमार इस मामले में खाताधारक है

  • अशोक ने अपना बैंक खाता अरुण को उपलब्ध कराया

  • अरुण ने वही खाता आगे साइबर ठगों को दे दिया

इस खाते में ठगी की राशि में से 38,000 रुपये ट्रांसफर हुए थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि—

  • बाकी राशि किन खातों में गई

  • क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं

  • ठगी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या नहीं


आरोपियों की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति

पूछताछ में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी—

  • अनपढ़ हैं

  • गाना बजाने का काम कर आजीविका चलाते हैं

पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पैसों के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए या वे किसी बड़े साइबर नेटवर्क के दबाव में आए।


न्यायालय में पेशी, 5 दिन का पुलिस रिमांड

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेशानुसार—

  • दोनों आरोपियों को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है

पुलिस रिमांड के दौरान—

  • अन्य बैंक खातों की जानकारी

  • टेलीग्राम ग्रुप और ऑनलाइन संपर्क

  • ठगी से जुड़े अन्य मामलों

को लेकर पूछताछ की जा रही है।


प्रीपेड टेलीग्राम टास्क ठगी: एक बढ़ता साइबर ट्रेंड

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, प्रीपेड टेलीग्राम टास्क ठगी आजकल तेजी से बढ़ रही है। इसमें आमतौर पर—

  • सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स

  • आसान कमाई के वादे

  • निवेश के बदले अधिक मुनाफा

जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता है।

शुरुआत में छोटी रकम वापस कर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी राशि निवेश करवाकर संपर्क तोड़ दिया जाता है।


आम नागरिकों के लिए पुलिस की अपील

फरीदाबाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • अनजान नंबर से आए जॉब या टास्क ऑफर से सावधान रहें

  • बिना सत्यापन किसी भी ऑनलाइन स्कीम में पैसा न लगाएं

  • अपना बैंक खाता, ओटीपी या केवाईसी विवरण किसी को न दें

  • ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं

समय पर शिकायत करने से राशि को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।


साइबर अपराध पर पुलिस की लगातार कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में—

  • तकनीकी संसाधनों का उपयोग

  • अंतरराज्यीय समन्वय

  • बैंकिंग ट्रेल का विश्लेषण

कर आरोपियों तक पहुंचा जा रहा है। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि आमजन की सतर्कता के बिना साइबर अपराध पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है।


निष्कर्ष

प्रीपेड टेलीग्राम टास्क के नाम पर 2,27,000 रुपये की ठगी के इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि साइबर ठग आम लोगों को निशाना बनाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। यह मामला सभी नागरिकों के लिए एक चेतावनी है कि ऑनलाइन कमाई से जुड़े लुभावने ऑफर के पीछे छिपे खतरे को समझें और किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों की जागरूकता ही साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत उपाय है।

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