हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला–2026 का शुक्रवार को औपचारिक शुभारंभ हुआ। यह मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपराष्ट्रपति का स्वागत किया।

यह आयोजन देश-विदेश के शिल्पकारों, कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां भारत सहित विभिन्न देशों की लोक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक परंपराएं प्रदर्शित की जा रही हैं।

उद्घाटन समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, सहयोगी देश मिस्र के राजदूत कमल जायद ग़लाल, हरियाणा के राजस्व एवं शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर, खेल, युवा अधिकारिता एवं उद्यमिता मंत्री गौरव गौतम उपस्थित रहे।

इसके अलावा भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्णा तथा पर्यटन विभाग हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल की उपस्थिति भी रही।

मेला परिसर का अवलोकन और औपचारिक शुभारंभ

उद्घाटन के उपरांत उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मेला परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने हरियाणा के अपना घर पवेलियन का दौरा किया, जहां परंपरागत हरियाणवी पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने इस वर्ष के थीम स्टेट मेघालय के स्टॉलों का अवलोकन किया और वहां मौजूद शिल्पकारों से संवाद किया।

उपराष्ट्रपति ने विभिन्न राज्यों और देशों के पवेलियनों में प्रदर्शित हस्तशिल्प, लोक कलाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखा तथा कलाकारों के कार्य की सराहना की। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मेला परिसर की मुख्य चौपाल में दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर आगंतुकों की सुविधा के लिए “मेला साथी ऐप” का भी शुभारंभ किया गया, जिससे मेले से जुड़ी जानकारी, नक्शा, कार्यक्रम और सुविधाओं तक डिजिटल रूप से पहुंच संभव हो सके।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना और शिल्प मेला

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और शिल्प कौशल का प्रतिनिधित्व करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह मेला ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की उस भारतीय अवधारणा को व्यवहार में प्रस्तुत करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखा जाता है।

उनके अनुसार, यह आयोजन उन हाथों और परंपराओं को मंच देता है, जिन्होंने पीढ़ियों से कला और शिल्प को जीवित रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के संदर्भ में शिल्पकारों और कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे पारंपरिक ज्ञान और कौशल के संवाहक हैं।

कारीगरों से जुड़ी योजनाओं का संदर्भ

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार द्वारा कारीगरों और शिल्पकारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष के भागीदार राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय देश की विविध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। वहीं सहयोगी देश के रूप में मिस्र की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद को और सशक्त बनाती है।

शिल्प मेला: सांस्कृतिक और आर्थिक पहलू

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक समय में बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद हाथ से बनी वस्तुओं और पारंपरिक शिल्प का अपना विशेष महत्व बना हुआ है। सूरजकुंड मेला इस बात का उदाहरण है कि सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से कारीगरों को न केवल पहचान मिलती है, बल्कि आर्थिक अवसर भी प्राप्त होते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बड़ी संख्या में लोगों ने मेले का भ्रमण किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह आयोजन आमजन के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री का संबोधन: प्राचीनता और आधुनिकता का संगम

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सोच का संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि बीते 38 वर्षों से यह मेला लोक कला और शिल्प परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विचार को आगे बढ़ाती है। उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक स्वावलंबन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण से भी जुड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और सांस्कृतिक समागम

मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि सभ्यताएं सहयोग और संवाद से समृद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि इस बार मिस्र जैसे सहयोगी देश और उत्तर प्रदेश व मेघालय जैसे भागीदार राज्यों की सहभागिता मेले को और विविधतापूर्ण बनाती है।

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराएं और मेघालय की जनजातीय विरासत, दोनों मिलकर मेले को बहुरंगी स्वरूप प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन राज्यों और देशों के बीच आपसी समझ और सौहार्द को मजबूत करते हैं।

‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा पर जोर

मुख्यमंत्री ने शिल्पकारों से अपील की कि वे अपनी कला को नई तकनीकों के साथ जोड़ें, ताकि उनके उत्पाद व्यापक बाजार तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आज कारीगर अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत कर सकते हैं।

उनका कहना था कि शिल्प मेले कलाकारों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ते हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है।

विरासत एवं पर्यटन मंत्री का वक्तव्य

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जहां पिछले संस्करण में कई देशों की भागीदारी रही थी, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और प्रतिभागी मेले में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह मेला शिल्पकारों और कलाकारों के लिए एक ऐसा मंच है, जहां उन्हें न केवल आर्थिक अवसर मिलते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान भी प्राप्त होती है। सुरक्षा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं, ताकि आगंतुकों को सुविधा मिल सके।

हरियाणा की विरासत और राखीगढ़ी का उल्लेख

डॉ. अरविंद शर्मा ने अपने संबोधन में हरियाणा की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से राखीगढ़ी का संदर्भ देते हुए कहा कि यह प्राचीन सभ्यता वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

उनके अनुसार, राखीगढ़ी में विकसित शहरी नियोजन, जल निकासी और सामुदायिक संरचनाओं के प्रमाण आज भी अध्ययन का विषय हैं। राज्य सरकार द्वारा इन धरोहरों को पर्यटन मानचित्र पर समझाने और प्रस्तुत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधि और अधिकारी

इस अवसर पर बल्लभगढ़ से विधायक मूलचंद शर्मा, बड़खल से विधायक धनेश अदलखा, फरीदाबाद एनआईटी से विधायक सतीश फागना, सोहना से विधायक तेजपाल तवर, राई से विधायक कृष्णा गहलावत, नलवा से विधायक रणधीर पनिहार उपस्थित रहे।

इसके अलावा फरीदाबाद की मेयर प्रवीण जोशी, फरीदाबाद मंडलायुक्त संजय जूण, मेला मुख्य प्रशासक पार्थ गुप्ता, उपायुक्त आयुष सिन्हा, नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा, पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक खांगवाल भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

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