rTMS तकनीक से न्यूरोलॉजिकल और कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में मिलेगी मदद, मरीजों को अपने शहर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल
फरीदाबाद, 29 अक्टूबर। वर्ल्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट का शुभारंभ किया गया। इस यूनिट में रिपीटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से बिना सर्जरी के चुंबकीय तरंगों की मदद से मस्तिष्क के विशेष हिस्सों की गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है। नई सुविधा का उद्घाटन मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के फाउंडिंग मेंबर, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने किया।
इस पहल का उद्देश्य न्यूरोलॉजी सेवाओं को मजबूत करना और मरीजों को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध कराना है। अस्पताल के अनुसार, इस तकनीक की उपयोगिता स्ट्रोक के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं, मूवमेंट डिसऑर्डर, लंबे समय से बने दर्द, माइग्रेन, टिनिटस यानी कानों में लगातार आवाज आने की समस्या तथा डिप्रेशन और ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी चुनिंदा स्थितियों में विशेषज्ञों की निगरानी में आंकी जाएगी। निकोटीन की लत छुड़ाने में सहायक उपचार के रूप में भी इसकी संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। उपचार का निर्णय मरीज की स्थिति, चिकित्सकीय साक्ष्यों और व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर लिया जाएगा।
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद की प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर (न्यूरोलॉजी) डॉ. सुषमा शर्मा ने बताया कि मस्तिष्क में परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और न्यूरल कनेक्शन को पुनर्गठित करने की क्षमता होती है, जिसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। rTMS तकनीक चुंबकीय पल्स के माध्यम से मस्तिष्क के विशेष हिस्सों की न्यूरल गतिविधियों को प्रभावित करने में मदद करती है। उचित मरीजों का चयन करके इस तकनीक का उपयोग मौजूदा उपचार के साथ किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के बाद पुनर्वास, पार्किंसनिज्म में मांसपेशियों की अकड़न, फाइब्रोमायल्जिया, न्यूरोलॉजिकल दर्द तथा कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में इस तकनीक की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों में नियमित पुनर्वास के साथ इसका इस्तेमाल हाथ-पैरों की गतिविधियों और रिकवरी में सुधार की संभावनाओं को तलाशने में सहायक हो सकता है। हालांकि, बेहतर परिणामों के लिए मरीज का सही चयन, व्यक्तिगत उपचार योजना और लगातार चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है।
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. (कर्नल) नवनीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर इस यूनिट की शुरुआत मरीजों तक आधुनिक चिकित्सा तकनीक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। न्यूरोलॉजिकल बीमारियां मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी आत्मनिर्भरता, मानसिक स्थिति और जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं। नई यूनिट से न्यूरोलॉजी सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को उनकी जरूरतों के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में आधुनिक उपचार सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल सकें, ताकि उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े चिकित्सा केंद्रों पर जाने की आवश्यकता कम हो।
एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत के साथ अस्पताल ने न्यूरोसाइंसेज के क्षेत्र में अपनी सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाओं, आपातकालीन स्ट्रोक प्रबंधन, पुनर्वास सेवाओं और उन्नत उपचार तकनीकों को एकीकृत करते हुए मरीजों को व्यापक न्यूरोलॉजिकल देखभाल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

