फरीदाबाद, फरवरी। सेक्टर-33 स्थित विद्युत मंत्रालय के राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) में आयोजित सांस्कृतिक संध्या “एक शाम – भारतीय संस्कृति के नाम” के अंतर्गत प्रख्यात कथक कलाकार विश्वदीप शर्मा ने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति से सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूरदर्शन के ए-ग्रेडेड आर्टिस्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके कलाकार विश्वदीप शर्मा ने शास्त्रीय कथक की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गरिमा को सजीव कर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन ग्रिड ऑपरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन के सदस्य एवं एनपीटीआई के महानिदेशक हेमंत जैन के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें फाउंडेशन बैच के ट्रेनी, एमबीए तथा पीजीडीसी के विद्यार्थियों सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान निदेशक (ट्रेनिंग) डॉ. इंदु महेश्वरी द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर निदेशक (ट्रेनिंग) डॉ. वत्सला शर्मा, सहायक निदेशक अनुराग राय सहित संस्थान के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

भाव, ताल और परंपरा का अद्भुत संगम

विश्वदीप शर्मा की प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक ताल, लय और भाव-भंगिमाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। उन्होंने देवी स्तुति, माखन चोरी प्रसंग तथा घुंघरुओं की जटिल लयकारी के माध्यम से विविध नृत्य शैलियों का प्रदर्शन किया। हस्त मुद्राओं के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूप, उनके अस्त्र-शस्त्र और अलंकरणों का सजीव चित्रण किया गया।
उन्होंने ब्रज क्षेत्र में मनाए जाने वाले दीर्घकालिक होली उत्सव को राधा-कृष्ण प्रेम की भावनाओं के साथ प्रस्तुत कर दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

यह सांस्कृतिक संध्या “शिक्षा के साथ संस्कृति” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। संस्थान ने भविष्य में ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की योजना व्यक्त की, ताकि पारंपरिक कलाओं और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के बीच संतुलित एवं रचनात्मक वातावरण विकसित हो सके।

कौन हैं विश्वदीप शर्मा

विश्वदीप शर्मा भारतीय शास्त्रीय कथक नर्तक हैं और जयपुर घराने की युवा पीढ़ी के प्रमुख प्रतिनिधियों में गिने जाते हैं। वे गुरु नारायण प्रसाद के वरिष्ठ शिष्य हैं तथा दूरदर्शन के ए-ग्रेडेड कलाकार हैं। उन्हें संस्कृति मंत्रालय, साहित्य कला परिषद एवं कथक केंद्र से विभिन्न छात्रवृत्तियाँ प्राप्त हुई हैं।
उन्होंने संगीत नाटक अकादमी के कथक केंद्र रिपर्टरी में ए-ग्रेड कलाकार के रूप में लगभग पाँच वर्षों तक कार्य किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनेक प्रस्तुतियाँ देने के साथ-साथ उन्होंने भारत और विदेशों में कार्यशालाएँ आयोजित कीं तथा कई नृत्य नाट्य प्रस्तुतियों का निर्देशन एवं कोरियोग्राफी की।
वे मीराबाई, सूरदास, कबीर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और मिर्ज़ा ग़ालिब जैसे कवियों की रचनाओं पर आधारित प्रस्तुति कार्य कर चुके हैं।

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