संवाददाता – Ambika Prasad Ojha (Journalist)
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फरीदाबाद जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि बाल विवाह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, जिसे किसी भी परिस्थिति में न तो स्वीकार किया जा सकता है और न ही अनदेखा किया जाना चाहिए।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चला जागरूकता अभियान
जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मुजेसर क्षेत्र, एनआईटी जोन, ग्राम नचौली के विद्यालयों और ग्राम मोहना सहित कई स्थानों पर बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों, युवाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, इससे जुड़े कानूनों और बच्चों के अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही सभी से यह शपथ भी दिलाई गई कि वे स्वयं कभी बाल विवाह नहीं करेंगे और न ही अपने आसपास कहीं होने वाले बाल विवाह को चुपचाप सहन करेंगे।
बाल विवाह: कानूनन गंभीर अपराध
जागरूकता कार्यक्रमों में हेमा कौशिक, संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी, ने बाल विवाह से संबंधित कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक संज्ञेय और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि:
यदि किसी बालक या बालिका की आयु कानूनन निर्धारित उम्र से कम है और उसका विवाह किया जाता है, तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आता है
ऐसे मामलों में केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि
रिश्तेदार
बिचौलिये
पंडित, मौलवी या अन्य धार्मिक व्यक्ति
विवाह आयोजन में सहयोग करने वाले लोग
भी कानून के दायरे में आते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है
यह जानकारी आमजन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताई गई, क्योंकि कई बार लोग यह मान लेते हैं कि जिम्मेदारी केवल माता-पिता की होती है, जबकि कानून सभी सहयोगियों को समान रूप से उत्तरदायी मानता है।
बच्चों के भविष्य पर पड़ता है गहरा असर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है। कम उम्र में विवाह के कारण बच्चों को:
शिक्षा से वंचित होना पड़ता है
स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं
मानसिक दबाव और सामाजिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता है
विशेष रूप से बालिकाओं के लिए बाल विवाह भविष्य में अनेक स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौतियों का कारण बनता है। इसी कारण सरकार और जिला प्रशासन इस विषय को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है।
सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई का आग्रह
संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले, तो वे इसे नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि समय रहते सूचना देने से बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह की सूचना देने के लिए:
नजदीकी पुलिस थाना या पुलिस चौकी से संपर्क किया जा सकता है
24 घंटे सक्रिय पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है
उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और जिला प्रशासन प्रत्येक शिकायत पर तुरंत एवं प्रभावी कार्रवाई करेगा।
समाज की भूमिका सबसे अहम
कार्यक्रमों के दौरान यह भी जोर देकर कहा गया कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होकर आगे आना होगा।
वक्ताओं ने कहा कि:
माता-पिता को बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए
युवाओं को इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए
शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता जागरूकता फैलाने में सहयोग करें
पंचायत और स्थानीय स्तर पर सतर्कता रखी जाए
जब समाज स्वयं बाल विवाह के विरुद्ध खड़ा होगा, तभी इसका स्थायी समाधान संभव है।
जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फरीदाबाद जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर शून्य सहनशीलता नीति अपनाई गई है। उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरा भविष्य सुनिश्चित करना है।
विद्यालयों में विशेष जागरूकता
ग्राम नचौली के विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भी बाल विवाह के बारे में सरल भाषा में समझाया गया। बच्चों को यह बताया गया कि शिक्षा उनका अधिकार है और कम उम्र में विवाह उनके सपनों और भविष्य में बाधा बन सकता है।
विद्यालय स्तर पर जागरूकता को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बच्चे स्वयं भी जागरूक होकर अपने परिवार और समाज को सही दिशा दिखा सकते हैं।
शपथ के माध्यम से सामूहिक संकल्प
कार्यक्रमों में दिलाई गई शपथ को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सामूहिक सामाजिक संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया। उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि:
वे बाल विवाह नहीं करेंगे
बाल विवाह को बढ़ावा नहीं देंगे
और यदि कहीं ऐसा होता दिखे, तो उसकी सूचना जरूर देंगे
निष्कर्ष
फरीदाबाद जिले में चलाया गया यह बाल विवाह विरोधी अभियान यह स्पष्ट करता है कि जिला प्रशासन बच्चों के अधिकारों और भविष्य को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। बाल विवाह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है, लेकिन जागरूकता, समय पर सूचना और सामाजिक सहभागिता से इसे रोका जा सकता है। उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में चल रहे ये कार्यक्रम समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि बच्चों का बचपन, शिक्षा और सम्मान सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

