फरीदाबाद में केंद्रीय बजट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता सुमित गौड़ ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने बजट को गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की अपेक्षाओं से अलग बताते हुए कहा कि इसमें आम नागरिकों को प्रत्यक्ष राहत महसूस नहीं होती।
सुमित गौड़ ने जारी प्रेस बयान में कहा कि बजट से लोगों को रोजगार, महंगाई और कर राहत को लेकर उम्मीदें थीं, लेकिन बजटीय प्रावधानों में इन वर्गों के लिए कोई ठोस राहत दिखाई नहीं देती।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की अपेक्षाएं
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि बजट के दौरान आमतौर पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को कर राहत, महंगाई से राहत और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में नियंत्रण जैसी उम्मीदें रहती हैं। उनके अनुसार, इस बजट में—
आयकर स्लैब में कोई नया बदलाव नहीं किया गया
मध्यमवर्गीय करदाताओं को अतिरिक्त छूट की घोषणा नहीं हुई
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच आम परिवारों को राहत देने वाले उपायों की अपेक्षा थी, जो बजट में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती।
शेयर बाजार और निवेश से जुड़े मुद्दे
सुमित गौड़ ने शेयर बाजार से जुड़े प्रावधानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बजट से पहले निवेशकों को यह उम्मीद थी कि शेयरों के लेन-देन पर लगने वाले एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में राहत मिल सकती है। हालांकि, बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस से जुड़े कर ढांचे में बदलाव किए गए।
उनके अनुसार, इन प्रावधानों से शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों की चिंताओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए नीतियों में संतुलन आवश्यक होता है।
व्यवसायिक गतिविधियों पर प्रभाव
प्रदेश प्रवक्ता ने बजट में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि—
कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि से
होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर
परिचालन लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है
उनका कहना था कि छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय पहले से ही बढ़ती लागत और प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं, ऐसे में उन्हें राहत की आवश्यकता थी।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर पर बजट
सुमित गौड़ ने मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स से जुड़े बजट प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन को बढ़ाकर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये किया गया है, जो औद्योगिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
हालांकि, उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रावधानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने वाले उपाय भी समान रूप से जरूरी हैं, ताकि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंच सके।
हरियाणा के लिए बजट प्रावधानों पर सवाल
प्रदेश प्रवक्ता ने केंद्रीय बजट में हरियाणा से जुड़े प्रावधानों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि—
बजट में हरियाणा के लिए कोई विशेष नई घोषणा नजर नहीं आती
राज्य की आर्थिक भागीदारी और योगदान के अनुपात में अपेक्षित प्रावधान दिखाई नहीं देते
उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक और राजस्व योगदान देने वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन बजट में राज्य से संबंधित विकास योजनाओं का उल्लेख सीमित है।
राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय संतुलन की जरूरत
सुमित गौड़ ने कहा कि किसी भी केंद्रीय बजट में राज्यों के बीच संतुलित विकास को ध्यान में रखना जरूरी होता है। उनके अनुसार—
राज्यों को उनके योगदान और जरूरतों के अनुसार संसाधन मिलना चाहिए
बुनियादी ढांचे, रोजगार और सामाजिक योजनाओं के लिए राज्यों को पर्याप्त समर्थन जरूरी है
उन्होंने कहा कि बजट पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इन प्रतिक्रियाओं का उद्देश्य जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना होता है।
बजट पर सार्वजनिक चर्चा का महत्व
प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा और प्राथमिकताओं को दर्शाता है। इसलिए इस पर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा आवश्यक है, ताकि नीतियों में सुधार और संतुलन की गुंजाइश बनी रहे।
उन्होंने कहा कि आमजन, व्यापारी, किसान, युवा और मध्यमवर्गीय परिवार बजट से सीधे प्रभावित होते हैं, इसलिए उनकी अपेक्षाओं और चिंताओं को नीति निर्माण में स्थान मिलना चाहिए।

