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फरीदाबाद | 2 फरवरी 2026

फरीदाबाद में साइबर ठगी के एक नए तरीके का खुलासा करते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने क्रेडिट कार्ड को VISA से RuPay में कन्वर्ट करने के नाम पर 1,44,999 रुपये की ठगी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह ठग तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाकर आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

फरीदाबाद पुलिस ने इस कार्रवाई के साथ एक बार फिर स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त और सतत अभियान जारी रहेगा।


अंजान कॉल से शुरू हुई ठगी की कहानी

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब सेक्टर-15, फरीदाबाद निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसके मोबाइल फोन पर एक अंजान नंबर से कॉल आया था।

कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक से जुड़ा प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उसके क्रेडिट कार्ड को VISA से RuPay कार्ड में बदला जा सकता है, जिससे उसे भविष्य में कई अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। बातचीत के दौरान ठग ने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और आधिकारिक है।


व्हाट्सएप लिंक के जरिए ली गई जानकारी

शिकायतकर्ता के अनुसार, कॉल के बाद उसके व्हाट्सएप नंबर पर एक लिंक भेजा गया। ठग ने कहा कि लिंक पर जाकर कुछ आवश्यक जानकारी भरने से कार्ड कन्वर्जन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

भरोसे में आकर शिकायतकर्ता ने लिंक खोलकर:

  • क्रेडिट कार्ड नंबर

  • एक्सपायरी डेट

  • अन्य आवश्यक विवरण

भर दिए। जानकारी भरने के कुछ ही समय बाद शिकायतकर्ता के क्रेडिट कार्ड से 1,44,999 रुपये की राशि कट गई।


पैसे कटते ही हुआ ठगी का अहसास

जब शिकायतकर्ता को अपने कार्ड से बड़ी राशि कटने का मैसेज मिला, तो उसने तुरंत संबंधित नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन तब तक:

  • कॉल करने वाला नंबर बंद हो चुका था

  • व्हाट्सएप पर भेजा गया लिंक निष्क्रिय हो गया था

  • किसी भी माध्यम से संपर्क संभव नहीं था

इसके बाद शिकायतकर्ता को यह स्पष्ट हो गया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। उसने बिना देरी किए साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई।


शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मामला

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना सेंट्रल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ठगी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस की साइबर टीम ने:

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)

  • व्हाट्सएप लिंक की तकनीकी जानकारी

  • ट्रांजेक्शन डिटेल्स

का विश्लेषण शुरू किया।

तकनीकी जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी के लिए जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था, वह एक अलग व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था।


आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी

जांच में सामने आया कि जिस सिम कार्ड से शिकायतकर्ता को कॉल किया गया था, वह अरुण राजपूत (22 वर्ष) निवासी महोवा, उत्तर प्रदेश के नाम पर जारी था। पुलिस ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपनी SIM कार्ड ठगों को बेच दी थी, जिसका इस्तेमाल इस साइबर ठगी में किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी स्वयं सीधे ठगी की रकम नहीं निकाल रहा था, लेकिन उसने अपनी सिम उपलब्ध कराकर अपराध में सहयोग किया।


आरोपी की पृष्ठभूमि

पुलिस ने बताया कि आरोपी अरुण राजपूत:

  • बी.ए. तृतीय वर्ष का छात्र है

  • महोवा, उत्तर प्रदेश का निवासी है

  • उसने आर्थिक लाभ के लालच में अपनी सिम ठगों को दी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधों में इस तरह SIM बेचने या किराए पर देने की भूमिका भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है, क्योंकि इससे ठगों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलती है।


अदालत में पेश, पुलिस रिमांड पर

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड के दौरान पुलिस:

  • मुख्य ठगों की पहचान

  • ठगी में इस्तेमाल किए गए नेटवर्क

  • अन्य सिम और खातों की भूमिका

जैसे पहलुओं की जांच कर रही है।


SIM बेचने वालों पर भी सख्ती

साइबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:

  • अपनी SIM किसी और को देना कानूनन अपराध है

  • इससे साइबर ठगी, फर्जी कॉल और वित्तीय अपराध बढ़ते हैं

  • SIM धारक भी कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है

इसी कारण पुलिस ऐसे मामलों में SIM उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर रही है।


क्रेडिट कार्ड ठगी के बढ़ते मामले

हाल के समय में क्रेडिट कार्ड से जुड़ी ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। साइबर अपराधी आमतौर पर:

  • कार्ड अपग्रेड या कन्वर्जन का बहाना

  • रिवॉर्ड प्वाइंट या कैशबैक का लालच

  • फर्जी लिंक और वेबसाइट

का इस्तेमाल कर लोगों को ठगते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक या कार्ड कंपनियां कभी भी:

  • फोन पर पूरी कार्ड डिटेल नहीं मांगतीं

  • व्हाट्सएप लिंक भेजकर जानकारी भरने को नहीं कहतीं


पुलिस की नागरिकों से अपील

फरीदाबाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि:

  • किसी भी अंजान कॉल पर अपनी बैंक या कार्ड डिटेल साझा न करें

  • व्हाट्सएप या SMS में आए लिंक पर बिना सत्यापन क्लिक न करें

  • कार्ड से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए सीधे बैंक की आधिकारिक शाखा या हेल्पलाइन से संपर्क करें

  • साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें

पुलिस का कहना है कि सावधानी और जागरूकता ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।


जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश

साइबर थाना सेंट्रल की टीम अब इस मामले में मुख्य ठगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस को आशंका है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का मामला हो सकता है, जिसमें:

  • कई SIM कार्ड

  • फर्जी लिंक

  • अलग-अलग कॉल सेंटर जैसी संरचना

का इस्तेमाल किया जा रहा हो।


साइबर अपराध पर जीरो टॉलरेंस

फरीदाबाद पुलिस ने दोहराया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। चाहे प्रत्यक्ष ठगी करने वाला हो या सहयोगी भूमिका निभाने वाला, सभी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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